मध्य प्रदेश की धरती कभी डायनासोरों का बसेरा थी। मिशन लाइफ प्रदर्शनी में धार से मिला 6.5 करोड़ साल पुराना जीवाश्मित अंडा भोपाल रीजनल साइंस सेंटर में आक …और पढ़ें

रीजनल साइंस सेंटर में आयोजित प्रदर्शनी में धार जिले से मिला डायनासोर का जीवाश्मित अंडा, जो मप्र की समृद्ध प्राकृतिक विरासत की झलक दिखाता है।
HighLights
- इन अंडों की प्रजातियां अमेरिका व यूरोप में मिले जीवाश्मों से मिलती हैं
- नर्मदा घाटी से राजासारस नर्मदेंसिस और टाइटेनोसार के जीवाश्म मिले
- धार फॉसिल नेशनल पार्क, इंदौर रालामंडल में भी जीवाश्म संरक्षित हैं
भोपाल। डायनासोर… यह शब्द सुनते ही आंखों के सामने करोड़ों साल पहले पृथ्वी पर विचरण करने वाले विशालकाय जीवों की तस्वीर उभर आती है। कम ही लोग जानते हैं कि मध्यप्रदेश की धरती भी कभी डायनासोरों का बसेरा रही है। नर्मदा घाटी क्षेत्र में मिले जीवाश्मों ने साबित किया है कि यहां करोड़ों वर्ष पहले विशाल शाकाहारी टाइटेनोसार और भारत का प्रसिद्ध मांसाहारी डायनासोर राजासारस नर्मदेंसिस विचरण करता था।
इसी गौरवशाली प्राकृतिक विरासत से लोगों को रूबरू कराने के लिए इकोटूरिज्म विकास बोर्ड द्वारा आयोजित ‘मिशन लाइफ’ प्रदर्शनी में धार जिले से मिले डायनासोर के जीवाश्मित अंडे को भोपाल लाया गया। रीजनल साइंस सेंटर में प्रदर्शित यह दुर्लभ जीवाश्म दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बना रहा। पहली नजर में साधारण गोल पत्थर जैसा दिखाई देने वाला यह अंडा वास्तव में करीब 6.5 करोड़ वर्ष पुराना जीवाश्म है।
वैज्ञानिकों के अनुसार, यह लेट क्रेटेशियस काल का अंडा है, जब पृथ्वी पर डायनासोरों का अंतिम दौर चल रहा था। धार और नर्मदा घाटी क्षेत्र से बड़ी संख्या में डायनासोर के अंडे, घोंसले और जीवाश्म मिल चुके हैं, जिनके अध्ययन से भारत के प्रागैतिहासिक जीवन की महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं।
नर्मदा घाटी में मिला था ‘राजा डायनासोर’
वर्ष 2003 में वैज्ञानिकों ने नर्मदा घाटी क्षेत्र से प्राप्त मांसाहारी डायनासोर के जीवाश्मों का अध्ययन कर उसे राजासारस नर्मदेंसिस नाम दिया। इसका अर्थ है ‘नर्मदा का राजा सरीसृप’। यह एबेलिसारिड थेरोपोड परिवार का सदस्य था और उस समय भारतीय उपमहाद्वीप के शीर्ष शिकारी जीवों में शामिल माना जाता था।

विशेषज्ञों के अनुसार राजासारस लगभग 6.6 से 9 मीटर लंबा और 1 से 4 टन वजनी था। इसकी सबसे बड़ी पहचान सिर पर मौजूद सींगनुमा उभार था। मजबूत जबड़ों और शक्तिशाली शरीर वाला यह शिकारी संभवतः टाइटेनोसार जैसे विशाल शाकाहारी डायनासोरों का शिकार करता था।
रोचक तथ्य
धार से मिला जीवाश्मित अंडा लगभग 6.5 करोड़ वर्ष पुराना है। कभी इसके भीतर एक डायनासोर का भ्रूण विकसित हो रहा था। आज यही जीवाश्म मध्यप्रदेश की समृद्ध पुराजीव वैज्ञानिक विरासत की कहानी बयां कर रहा है।
मप्र की डायनासोर विरासत
- धार में स्थित है डायनासार फासिल नेशनल पार्क
- जियो हेरिटेज साइट के रूप में विकसित करने की तैयारी
- रालामंडल संग्रहालय, इंदौर में भी सुरक्षित हैं जीवाश्म
- अक्टूबर में वाइल्ड लाइफ वीक के दौरान फिर प्रदर्शित होगा डायनासोर अंडे का जीवाश्म
- राजासारस नर्मदेंसिस बना बच्चों के आकर्षण का केंद्र
दुनिया से जुड़े भारत के डायनासोर
धार जिले से प्राप्त अंडों की प्रजातियां दक्षिण अमेरिका व दक्षिणी यूरोप में मिले जीवाश्मों से समानता रखती हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि इससे उस दौर के महाद्वीपीय संबंधों व जीव-जंतुओं के प्रसार को समझने में मदद मिलती है।

बच्चों में विज्ञान के प्रति बढ़ती है जिज्ञासा
बच्चों में पुराजीव विज्ञान (पैलियान्टोलाजी) और डायनासोर अध्ययन के प्रति रुचि विकसित करने के उद्देश्य से ऐसे आयोजन किए जाते हैं। हमारे परिसर में भी डायनासोर पार्क है, जो बच्चों के बीच काफी लोकप्रिय है। हम समय-समय पर विभिन्न संस्थानों की विशेष वैज्ञानिक धरोहरों को सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए लाते हैं, ताकि बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा बढ़े और वे पृथ्वी के विकासक्रम तथा प्रागैतिहासिक जीवन को बेहतर ढंग से समझ सकें। – साकेत सिंह कौरव प्रधान क्यूरेटर एवं केंद्र प्रमुख, रीजनल साइंस सेंटर, भोपाल
इंदौर के रालामंडल में जीवाश्म संरक्षित हैं
धार स्थित डायनासोर फासिल नेशनल पार्क को जियो हेरिटेज साइट के रूप में विकसित करने की दिशा में काम चल रहा है। इंदौर के रालामंडल संग्रहालय में भी डायनासोर के जीवाश्म संरक्षित हैं। हमने वन मेले में भी राजासारस नर्मदेंसिस का भव्य माडल प्रदर्शित किया था, जिसके साथ बच्चों ने तस्वीरें खिंचवाईं। अक्टूबर में वन्यजीव सप्ताह के दौरान भी इस दुर्लभ जीवाश्म को फिर से प्रदर्शित किया जाएगा। – विशाल पाटिल, मैनेजर इको टूरिज्म विकास बोर्ड, भोपाल




