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मप्र के शहरों में घट रही प्रजनन दर, करियर और देर से शादी बन रहे कारण

 

भोपाल। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-6 (NFHS-6) 2023-24 की रिपोर्ट में मध्य प्रदेश की सामाजिक और स्वास्थ्य संबंधी तस्वीर के कई महत्वपूर्ण पहलू सामने आए हैं। कुछ संकेतकों में सुधार दर्ज किया गया है, जबकि कुछ मामलों में चिंता भी बनी हुई है।

रिपोर्ट के अनुसार जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए कुल प्रजनन दर (TFR) 2.1 होना आवश्यक माना जाता है। मध्य प्रदेश में औसत प्रजनन दर 2.1 है, लेकिन शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है। शहरी क्षेत्रों में यह दर 1.7 है, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में 2.1 बनी हुई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शहरों में करियर को प्राथमिकता, देर से विवाह और छोटे परिवार की सोच के कारण प्रजनन दर कम हो रही है। वहीं तनावपूर्ण जीवनशैली, अनिद्रा और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी इसकी वजह मानी जा रही हैं।

बाल विवाह अब भी चुनौती

रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश में 20 से 24 वर्ष आयु वर्ग की 20 प्रतिशत महिलाओं की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले हो चुकी थी। हालांकि पिछले वर्षों की तुलना में इसमें गिरावट आई है, लेकिन यह आंकड़ा अब भी चिंता का विषय है।

62 प्रतिशत महिलाएं इंटरनेट का उपयोग कर रहीं

रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में 62 प्रतिशत महिलाएं इंटरनेट का उपयोग करती हैं, एनएफएचएस-5 में यह आंकड़ा 26 प्रतिशत था। महिलाओं के प्रति घरेलू हिंसा के मामले भी घटे हैं। सर्वें में 70 प्रतिशत महिलाएं ही ऐसी मिलीं जो कभी स्कूल गई हों।

स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार

-12 से 23 माह आयु वर्ग के बच्चों का पूर्ण टीकाकरण 77 प्रतिशत से बढ़कर 81.5 प्रतिशत हो गया।

– 73 प्रतिशत परिवार अब स्वास्थ्य बीमा के दायरे में आ चुके हैं, जबकि पिछली रिपोर्ट में यह आंकड़ा 38 प्रतिशत था।

– स्कूल जाने वाली महिलाओं का प्रतिशत 67.5 से बढ़कर 70 प्रतिशत हो गया है।

– महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा के मामलों में भी कमी दर्ज की गई है।

संस्थागत प्रसव में मामूली गिरावट

रिपोर्ट में एक चिंताजनक तथ्य यह भी सामने आया कि अस्पतालों में प्रसव का प्रतिशत 90.7 से घटकर 89.8 रह गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता बढ़ने के बावजूद इस सूचकांक में गिरावट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

शिक्षा का स्तर अच्छा होने के कारण लोग बेटा-बेटी में भेद नहीं करते। एक-दो बच्चों को जन्म देना ही बेहतर समझते हैं। वहीं लोग करिअर के चक्कर में देर से शादी करते हैं। 35 वर्ष की उम्र के बाद गर्भधारण में समस्या आने लगती है। एक छोटा कारण यह भी है कि शहरी क्षेत्र के लोगों में जिंदगी ग्रामीण की तुलना में ज्यादा तनाव वाली है। तनाव, अनिद्रा व खराब जीवन शैली के चलते प्रजनन क्षमता भी कम होती है।- डॉ. अजय हलदर, पूर्व प्राध्यापक, स्त्री एवं प्रसूति रोग, एम्स भोपाल

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