मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों का दो दिवसीय आंदोलन मंगलवार को समाप्त हो गया।
_m.webp)
मप्र में व्यावसायिक प्रशिक्षकों का आंदोलन समाप्त
HighLights
- आयुक्त से चर्चा के बाद व्यावसायिक प्रशिक्षकों का दो दिवसीय आंदोलन समाप्त हुआ
- सभी प्रशिक्षकों के नियुक्ति आदेश जारी होंगे, नई कंपनियों से अनुबंध की प्रक्रिया शुरू होगी
- वेतन वृद्धि, जॉब सुरक्षा, मेडिकल लीव और मातृत्व अवकाश समेत चार प्रमुख मांगें उठाईं
भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में कार्यरत व्यावसायिक प्रशिक्षकों का दो दिवसीय आंदोलन मंगलवार को समाप्त हो गया। नवीन व्यावसायिक शिक्षा-प्रशिक्षक महासंघ के नेतृत्व में प्रशिक्षकों ने अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर सोमवार से अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया था। मंगलवार को बड़ी संख्या में प्रशिक्षक लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) पहुंचे और प्रदर्शन किया।
मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं
प्रदर्शन के दौरान महासंघ के प्रतिनिधिमंडल ने डीपीआई आयुक्त अभिषेक सिंह से मुलाकात कर अपनी मांगें रखीं। चर्चा के बाद आयुक्त ने कुछ मांगों पर सकारात्मक सहमति जताई और सभी प्रशिक्षकों के लिए एक जुलाई से नियुक्ति आदेश जारी करने की जानकारी दी। साथ ही उन्होंने बताया कि व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रमों के संचालन के लिए नई कंपनियों के साथ अनुबंध की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
वेतन वृद्धि और नौकरी सुरक्षा की मांग
प्रशिक्षकों ने सरकार के समक्ष सम्मानजनक वेतन वृद्धि, पांच से दस प्रतिशत वार्षिक वेतन वृद्धि, आकस्मिक अवकाश, मेडिकल लीव तथा महिला प्रशिक्षकों के लिए सवैतनिक मातृत्व अवकाश लागू करने की मांग रखी। इसके अलावा 12 माह की नियमित सेवा और पूर्ण जॉब सुरक्षा सुनिश्चित करने की भी मांग की गई।
10 वर्षों से मात्र 20 हजार रुपये मानदेय
महासंघ का कहना है कि दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों में व्यावसायिक प्रशिक्षकों का वेतन 38,600 रुपये से अधिक है, जबकि मध्य प्रदेश में प्रशिक्षक पिछले 10 वर्षों से मात्र 20 हजार रुपये मानदेय पर कार्य कर रहे हैं। संगठन ने उम्मीद जताई है कि शासन उनकी शेष मांगों पर भी जल्द सकारात्मक निर्णय लेगा।




