हाल के चुनावों में कई सीटों पर उम्मीदवारों के दलबदल और नामांकन रद्द होने जैसी घटनाओं से सबक लेते हुए, मध्य प्रदेश कांग्रेस ने एक बड़ी रणनीति तैयार की है। अब पार्टी लोकसभा, विधानसभा और यहां तक कि नगरीय निकाय चुनावों में भी मुख्य उम्मीदवार के साथ एक ‘डमी’ (वैकल्पिक) प्रत्याशी मैदान में उतारेगी।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, इस फैसले का मुख्य उद्देश्य किसी भी अप्रत्याशित परिस्थिति से निपटना है। अगर मुख्य उम्मीदवार का नामांकन पत्र किसी कारणवश रद्द हो जाता है या वह अंतिम समय पर पार्टी छोड़ देता है, तो डमी उम्मीदवार पार्टी की ओर से चुनाव लड़ सकेगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
कांग्रेस ने यह कदम हाल के वर्षों में घटी कई घटनाओं के बाद उठाया है, जहां डमी उम्मीदवार न होने के कारण पार्टी को भारी नुकसान उठाना पड़ा और कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटा।
इन प्रमुख उदाहरणों ने कांग्रेस को सतर्क किया:
-
इंदौर (2024 लोकसभा): कांग्रेस उम्मीदवार अक्षय कांति बम ऐन वक्त पर पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए, जिससे कांग्रेस मैदान से बाहर हो गई।
-
भिंड (पुराना मामला): डॉ. भागीरथ प्रसाद टिकट मिलने के बाद भाजपा में चले गए थे।
-
विदिशा (पुराना मामला): भाजपा की सुषमा स्वराज के खिलाफ कांग्रेस उम्मीदवार राजकुमार पटेल ने ‘बी फार्म’ लेने के बावजूद जमा नहीं किया था।
-
खजुराहो (2024 लोकसभा): कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार को समर्थन दिया था, लेकिन उनका नामांकन रद्द हो गया। अंततः कांग्रेस को सीपीआई उम्मीदवार का समर्थन करना पड़ा।
-
राज्यसभा चुनाव: मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने और वैकल्पिक व्यवस्था न होने के कारण, भाजपा उम्मीदवार कम संख्या बल के बावजूद निर्विरोध निर्वाचित हो गया।
कांग्रेस का मानना है कि डमी उम्मीदवार रखने से भाजपा को ‘वाकओवर’ मिलने की संभावना खत्म होगी और पार्टी हर परिस्थिति में चुनाव लड़ने के लिए तैयार रहेगी। यह रणनीति आने वाले चुनावों में कांग्रेस की स्थिति को मजबूत करने में मददगार साबित हो सकती है।




