एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में छोटे कारोबारियों पर बढ़ा बैंकों का भरोसा: दो साल में एमएसएमई कर्ज 36.47% बढ़ा, सूक्ष्म उद्यमों के ऋण में 47.57% की शानदार उछाल
भोपाल: मध्य प्रदेश के छोटे कारोबारियों, दुकानदारों और सूक्ष्म उद्यमियों के लिए एक बेहद सकारात्मक खबर सामने आई है। प्रदेश में किराना दुकान, आटा चक्की, फोटोकॉपी सेंटर जैसे छोटे व्यवसायों के प्रति बैंकों का भरोसा तेजी से बढ़ा है। वित्तीय वर्ष मार्च 2024 से मार्च 2026 के बीच के आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में एमएसएमई (MSME) सेक्टर को मिलने वाले बैंक ऋण में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे स्वरोजगार और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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एमएसएमई और सूक्ष्म कर्ज में भारी वृद्धि: प्रदेश में मार्च 2024 से मार्च 2026 के दो वर्षों के दौरान एमएसएमई को दिए जाने वाले कुल बैंक कर्ज में 36.47 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इनमें भी सबसे ज्यादा 47.57 प्रतिशत की बढ़ोतरी सूक्ष्म उद्यमों के कर्ज में दर्ज की गई, जो 60,400 करोड़ रुपये से बढ़कर 89,133 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।
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विभिन्न श्रेणियों में कर्ज की स्थिति:
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सूक्ष्म उद्यम: कुल कर्ज बढ़कर 89,133 करोड़ रुपये (मार्च 2026 के कुल एमएसएमई ऋण का लगभग 61 प्रतिशत हिस्सा)।
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लघु उद्यम: कर्ज 29,574 करोड़ रुपये से बढ़कर 38,035 करोड़ रुपये हुआ।
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मध्यम उद्यम: कर्ज 13,446 करोड़ रुपये से बढ़कर 17,167 करोड़ रुपये हुआ।
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समग्र रूप से देखें तो पिछले दो वर्षों में सूक्ष्म और लघु उद्यमों को मिलने वाले ऋण में 41.34 प्रतिशत की भारी तेजी आई है।
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कुल बैंक क्रेडिट से आगे निकला एमएसएमई सेक्टर: एमएसएमई ऋण की वृद्धि दर राज्य के कुल बैंक क्रेडिट की तुलना में भी काफी अधिक रही है। इस अवधि में प्रदेश का कुल व्यावसायिक बैंक कर्ज 27.12 प्रतिशत की दर से बढ़कर 5,93,511 करोड़ रुपये हुआ, जबकि एमएसएमई ऋण की वृद्धि दर 36.47 प्रतिशत रही।
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एसेट क्वालिटी (NPA) में सुधार: बैंकिंग ऋण में वृद्धि के साथ-साथ वित्तीय सेहत में भी सुधार देखा गया है। एमएसएमई ऋण में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (NPA) का अनुपात 5.79% से घटकर 4.38% रह गया है, जो बैंकों और कारोबारियों दोनों के लिए एक स्वस्थ संकेत है।
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स्वरोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा: जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र, भोपाल के प्रबंधक विवेक कुमार द्विवेदी के अनुसार, राज्य सरकार की मंशा नागरिकों को स्वरोजगार से जोड़ने की है। बैंकों द्वारा आसानी से ऋण मिलने से छोटे उद्यमी अपने व्यवसाय को मजबूत कर पा रहे हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर आजीविका के नए साधन तैयार हो रहे हैं।




