एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
ऐतिहासिक खोज: मध्य प्रदेश के दतिया में मिले मुगलकालीन 20 दुर्लभ फारसी पत्र; शाहजहां, अकबर और नूरजहां से जुड़े संदेशों का हुआ खुलासा
भोपाल: मध्य प्रदेश के दतिया से इतिहास और पुरातत्व प्रेमियों के लिए एक बेहद रोमांचक और दुर्लभ जानकारी सामने आई है। ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के तहत पांडुलिपियों के सर्वेक्षण के दौरान दतिया में मुगलकाल से जुड़े 20 दुर्लभ फारसी पत्र मिले हैं। इन पत्रों में मुगल सम्राट शाहजहां, अकबर और मलिका नूरजहां से जुड़े शाही संदेश, शेरो-शायरी और प्रेमभाव व्यक्त करने वाली पंक्तियां शामिल हैं। खास बात यह है कि ये पत्र बहुत छोटे आकार (जैसे चार गुणा चार इंच) के पर्चीनुमा हैं, जिन पर सोने की डस्ट का इस्तेमाल किया गया है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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मुमताज की खूबसूरती का जिक्र: शाहजहां द्वारा लिखे गए एक छोटे आकार (4×4 इंच) के फारसी पत्र में उनकी बेगम मुमताज की खूबसूरती और उनके चेहरे के तिल का बेहद काव्यात्मक वर्णन मिलता है। इन पत्रों में गुलाब के फूल का प्रतीक चिह्न बना है, जो शाहजहां की न्यायप्रियता को दर्शाता है।
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कबूतरों के जरिए भेजे जाते थे संदेश: इतिहास के जानकारों के अनुसार, मुगलकाल में ऐसे गोपनीय और शाही पत्रों को ‘बर प्रजाति’ के कबूतरों के गले में बेलनाकार ताबीज में भरकर भेजा जाता था। अबुल फजल की ‘आइन-ए-अकबरी’ में भी इसका उल्लेख मिलता है।
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अकबर और नूरजहां के पत्र भी शामिल: इस दुर्लभ संग्रह में सम्राट अकबर (जिनके पत्रों पर ‘उजुक’ नामक चौकोर निशान होता था) और नूरजहां से जुड़े पत्र भी मिले हैं। नूरजहां से संबंधित कुछ पत्रों में स्वर्ण मिश्रित स्याही से मोमबत्ती का बेहद बारीक चित्रण किया गया है।
क्यों खास हैं ये पत्र?
पुरातत्व विभाग के पुराविद डॉ. वसीम खान और अन्य विशेषज्ञों (जैसे डॉ. वजाहत शाह और इश्तियाक नूर) ने फारसी की पुरानी ‘रम्ज’ शैली (संकेत और इशारों वाली शैली) के इन पत्रों को बेहद मशक्कत के बाद पढ़ा है। ये पर्चियां लिखी तो गई थीं, लेकिन किन्हीं कारणों से भेजी नहीं जा सकीं, जिसके चलते ये मुड़ी हुई नहीं हैं और आज भी हिलाने पर इन पर लगी सोने की डस्ट साफ दिखाई देती है। पुरातत्व संचालनालय एवं अभिलेखागार के आयुक्त मदन कुमार नागरगोजे ने इन दुर्लभ पांडुलिपियों और ऐतिहासिक धरोहरों के मिलने की पुष्टि की है।




