मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का जमावड़ा एक बड़ी समस्या बनने लगा है। इसकी वजह से उन स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो गई है जहां उनकी स …और पढ़ें

शिक्षा विभाग का नया नियम। (AI से जेनरेट किया गया इमेज)
HighLights
- 20 से कम छात्र वाले हटेंगे अतिरिक्त शिक्षक।
- गांवों के खाली पदों को भरने की तैयारी।
- कैग की रिपोर्ट में सामने आईं गंभीर खामियां।
भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों का जमावड़ा एक बड़ी समस्या बनने लगा है। इसकी वजह से उन स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो गई है जहां उनकी सबसे अधिक जरूरत है। स्कूल शिक्षा विभाग ने अब इस असंतुलन को दूर करने की कवायद शुरू कर दी है। फिलहाल यह तय किया गया है कि जिस स्कूल में 20 से कम विद्यार्थी हैं, वहां अतिरिक्त शिक्षकों की तैनाती नहीं की जाएगी। इसके बजाय, ऐसे शिक्षकों को उन स्कूलों में भेजा जाएगा जहां पद रिक्त हैं और छात्रों की संख्या अधिक है।
कैग की रिपोर्ट में सामने आईं गंभीर खामियां
नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की 2026 की रिपोर्ट में प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था की कई खामियां उजागर हुई थीं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश में करीब एक लाख शिक्षकों के पद अभी भी खाली हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि 1,895 स्कूल ऐसे हैं जहां एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि 435 स्कूलों में छात्रों का नामांकन शून्य है। विभाग ने निर्णय लिया है कि शून्य नामांकन वाले स्कूलों के शिक्षकों को भी दूसरे स्कूलों में भेजा जाएगा। इसके अलावा, प्रदेश के 29,116 स्कूल वर्तमान में केवल एक या दो शिक्षकों के भरोसे चल रहे हैं।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच बड़ा असंतुलन
रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों की स्थिति सबसे अधिक खराब है। यहां शिक्षकों की भारी कमी है, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। इसके विपरीत, शहरी क्षेत्रों में कई स्कूलों में आवश्यकता से अधिक (अतिशेष) शिक्षक पदस्थ हैं। उदाहरण के तौर पर, अकेले भोपाल जिले में करीब 550 अतिशेष शिक्षक मौजूद हैं। आंकड़ों के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के 62,213 स्कूलों में 2,81,887 स्वीकृत पदों के मुकाबले केवल 1,98,175 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि शहरी क्षेत्रों के 4,601 स्कूलों में 47,556 स्वीकृत पदों के मुकाबले 43,319 शिक्षक मौजूद हैं।
युक्तियुक्तकरण और समायोजन की प्रक्रिया शुरू
इस असंतुलन को ठीक करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश जारी कर दिए हैं। अतिशेष शिक्षकों की काउंसलिंग कर उन्हें आवश्यकता वाले स्कूलों में पदस्थ किया जाएगा। इस दौरान शिक्षकों से उनकी प्राथमिकता भी पूछी जाएगी, ताकि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और संतुलित बनी रहे। साथ ही, पहले से रिक्त पदों का सटीक आकलन करने के निर्देश भी दिए गए हैं, जिससे भविष्य में दोबारा अतिशेष की स्थिति निर्मित न हो।
लोक शिक्षण संचालनालय का पक्ष
आयुक्त लोक शिक्षण संचालनालय, अभिषेक सिंह के अनुसार, ग्रीष्मावकाश के दौरान अतिशेष शिक्षकों का समायोजन पूरा कर लिया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करना है ताकि वहां की शैक्षणिक व्यवस्था में सुधार किया जा सके।




