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200 नवजात बच्चों में से एक में होने वाली ‘हाइपोस्पेडियस’ का भोपाल एम्स में होगा इलाज, मिलेगी हाईटेक सर्जरी की सुविधा

 

हाइपोस्पेडियस एक सामान्य जन्मजात विकृति है, जो लगभग प्रत्येक 200 नवजात बच्चों में से एक में पाई जाती है। यदि समय पर सर्जरी न की जाए, तो यह बच्चे के भव …और पढ़ें

200 नवजात बच्चों में से एक में होने वाली 'हाइपोस्पेडियस' का भोपाल एम्स में होगा इलाज, मिलेगी हाईटेक सर्जरी की सुविधा

सर्जरी में उपलब्धि हासिल करने पर डॉ. अभिनव के साथ एम्स के कार्यपालक निदेशक डॉ. माधवानंद कर।

HighLights

  1. हाइपोस्पेडियस का एम्स भोपाल में होगा सटीक इलाज
  2. हर गुरुवार को संचालित हो रहा विशेष क्लिनिक
  3. 200 में से एक बच्चे को होती है यह समस्या

भोपाल। हाइपोस्पेडियस एक सामान्य जन्मजात विकृति है, जो लगभग प्रत्येक 200 नवजात बच्चों में से एक में पाई जाती है। इसमें पेशाब का रास्ता अपने सामान्य स्थान (लिंग के अग्र भाग) के बजाय नीचे की ओर स्थित होता है। कई मामलों में इसके साथ कार्डी नामक समस्या भी होती है, जिससे लिंग में टेढ़ापन आ जाता है। यदि समय पर सर्जरी न की जाए, तो यह बच्चे के भविष्य और आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है। लेकिन अब एम्स भोपाल में इसकी हाईटेक सर्जरी की सुविधा मिल सकेगी।

बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग के सहायक प्राध्यापक डा. अभिनव सिंह ने हैदराबाद में आयोजित लाइव लापरेटिव वर्कशाप में हाइपोस्पेडियस सर्जरी का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया है। इस उपलब्धि पर एम्स के कार्यपालक निदेशक प्रो. डा. माधवानन्द कर ने उन्हें बधाई दी है। एम्स भोपाल में मरीजों की सुविधा के लिए प्रत्येक गुरुवार को एक समर्पित हाइपोस्पेडियस क्लिनिक संचालित किया जा रहा है। यहां विशेषज्ञों द्वारा मरीजों का समग्र मूल्यांकन किया जाता है।

 

रोग की गंभीरता के आधार पर यह सर्जरी एक या उससे अधिक चरणों में पूरी की जाती है। खास बात यह है कि प्लास्टिक सर्जरी विभाग के साथ-साथ यूरोलॉजी और पीडियाट्रिक सर्जरी विभाग में भी यह सुविधा पहले से उपलब्ध है, जिससे मरीजों को मल्टी-डिस्पिलनरी केयर मिल रही है।

एम्स में अब तक कई सफल हाइपोस्पेडियस सर्जरी हो चुकी

एम्स में अब तक कई सफल हाइपोस्पेडियस सर्जरी की जा चुकी हैं, जिनमें मूत्रमार्ग को सामान्य स्थिति में पुनर्निर्मित किया गया है। आधुनिक तकनीकों के उपयोग से सर्जरी के परिणाम अत्यंत संतोषजनक रहे हैं। डा. अभिनव सिंह के नए प्रशिक्षण के बाद अब जटिल से जटिल मामलों को भी नई माइक्रो-सर्जिकल तकनीकों से ठीक किया जा सकेगा।

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