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3 दिन में दस्तावेज अपलोड न करने पर अभ्यर्थी होंगे रेस से बाहर, जानिए क्यों जल्दबाजी में है शिक्षा विभाग

 

भोपाल। मध्य प्रदेश में प्राथमिक शिक्षकों (प्राइमरी टीचर्स) की भर्ती के लिए दस्तावेज अपलोड और वेरिफिकेशन की प्रक्रिया शुरू हो गई है। लेकिन शिक्षा विभाग द्वारा इसके लिए केवल 3 दिन का समय दिए जाने से अभ्यर्थियों में भारी बेचैनी और आक्रोश है।

विभाग ने स्पष्ट आदेश जारी किया है कि जो भी अभ्यर्थी तय समय-सीमा के भीतर एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर प्रोफाइल पंजीयन के साथ अपने दस्तावेज अपलोड नहीं कर पाएगा, उसे नियुक्ति प्रक्रिया से बाहर माना जाएगा।

10 हजार पदों पर होनी है भर्ती

राज्य में कुल 10,000 प्राइमरी शिक्षकों की नियुक्ति की जानी है, जिसमें शिक्षा विभाग के तहत 8,000 और आदिम जाति कल्याण विभाग के तहत 2,000 पद शामिल हैं।

समय-सीमा का गणित: अभ्यर्थियों को 20 जुलाई तक दस्तावेज अपलोड करने हैं और 21 जुलाई तक निर्धारित शिविरों में उपस्थित होकर उनका सत्यापन (वेरिफिकेशन) कराना होगा।

जल्दबाजी की वजह: विभागीय अधिकारियों का कहना है कि प्रक्रिया में पहले ही काफी देरी हो चुकी है। सरकार की तैयारी 27-28 जुलाई को चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र सौंपने की है, इसलिए प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है।

 

कोर्ट के निर्देश पर आया था रिवाइज्ड रिजल्ट: पूर्व में यह मामला हाई कोर्ट पहुंचा था, जहां से रिजल्ट को रिवाइज करने के निर्देश मिले थे। इसके बाद कर्मचारी चयन मंडल (ईसीबी) ने 14 जुलाई को संशोधित परिणाम जारी किया था। वर्तमान में करीब 400 मामले अभी भी कोर्ट में विचाराधीन हैं, जिन्हें छोड़कर शेष अभ्यर्थियों की भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

अभ्यर्थियों का तर्क: ‘वीकेंड और छुट्टियों के कारण समय बढ़ाना जरूरी’

तीन दिन की इस बेहद कम समय-सीमा पर अभ्यर्थियों ने सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि 18 से 20 जुलाई के बीच शनिवार और रविवार का अवकाश पड़ने के कारण कई लोग बाहर गए हुए हैं या आवश्यक दस्तावेज जुटाने में तकनीकी और व्यावहारिक दिक्कतों का सामना कर रहे हैं।

अभ्यर्थियों ने सरकार से दस्तावेज अपलोड और वेरिफिकेशन के लिए कुछ और दिन की मोहलत देने की मांग की है।

आयुक्त बोले- ‘समय पर्याप्त, केवल वैधानिक कारणों पर ही करेंगे विचार’

शिक्षा विभाग के आयुक्त अभिषेक सिंह ने समय-सीमा को लेकर साफ किया है कि तीन दिन का वक्त पर्याप्त है और सभी अभ्यर्थी तय समय पर अपनी प्रक्रिया पूरी करें।

उन्होंने कहा कि यदि कोई अभ्यर्थी किसी गंभीर और वाजिब (वैधानिक) कारण से दस्तावेज अपलोड करने या वेरिफिकेशन से चूकता है, तो विभाग उसके मामले पर अलग से विचार करेगा।

बिना किसी ठोस या वैधानिक वजह के प्रक्रिया से चूकने वाले अभ्यर्थियों को कोई राहत नहीं दी जाएगी।

आदिम जाति विभाग में अभी तैयारी का अता-पता नहीं

एक ओर जहां शिक्षा विभाग 27-28 जुलाई को नियुक्ति पत्र देने की जल्दबाजी में है, वहीं दूसरी ओर इस भर्ती प्रक्रिया के तहत करीब 2,000 शिक्षकों की नियुक्ति करने वाले आदिम जाति कल्याण विभाग में फिलहाल कोई तैयारी नहीं दिख रही है। इससे उन अभ्यर्थियों की चिंता बढ़ गई है जिनका चयन आदिम जाति विभाग के स्कूलों के लिए होना है।

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