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MP में इंडक्शन-इलेक्ट्रिक चूल्हों की भारी डिमांड, उज्ज्वला गैस की बुकिंग में भी आया उछाल, प्रशासन को कालाबाजारी की आशंका

एमपी में एलपीजी का ‘पावर कट’: उज्ज्वला बुकिंग में 100% का उछाल, अब बिजली के चूल्हों के भरोसे किचन

भोपाल: मध्य प्रदेश में रसोई गैस (LPG) की किल्लत ने आम आदमी के किचन का बजट और मिजाज दोनों बदल दिया है। व्यावसायिक गैस की आपूर्ति में बाधा आने के बाद अब घरेलू गैस को लेकर मची अफरा-तफरी ने एक नया संकट खड़ा कर दिया है। जहाँ एक तरफ उज्ज्वला योजना की बुकिंग अचानक दोगुनी हो गई है, वहीं दूसरी ओर इंडक्शन और इलेक्ट्रिक चूल्हों के लिए बाजार में ‘मारामारी’ मची है।

प्रमुख बिंदु (HighLights):

  • उज्ज्वला में ‘अदृश्य’ बुकिंग: महीनों से शांत रहने वाले उज्ज्वला कनेक्शनों पर अचानक बुकिंग बढ़ी; कालाबाजारी की आशंका।

  • इलेक्ट्रिक क्रांति: इंदौर और भोपाल जैसे शहरों में इंडक्शन और एयर फ्रायर की मांग में रिकॉर्ड तोड़ बढ़ोतरी।

  • रेलवे पर असर: भोपाल मंडल के रनिंग रूम के किचन अस्थायी रूप से बंद; लोको पायलटों के लिए भोजन का संकट।

  • प्रशासन का दावा: मुख्य सचिव अनुराग जैन ने कहा— “संकट नहीं है, 24 घंटे में मिलेगा सिलेंडर।”

उज्ज्वला योजना: डेटा में छिपा कालाबाजारी का खेल?

ग्वालियर समेत पूरे प्रदेश में उज्ज्वला योजना के तहत होने वाली बुकिंग में दो गुना उछाल देखा गया है।

  • ग्वालियर का आंकड़ा: जिले में 1.51 लाख कनेक्शन हैं। पहले मात्र 18-20% लोग रिफिल कराते थे, जो अब बढ़कर 45% हो गया है।

  • आशंका: जानकारों का मानना है कि सब्सिडी वाले इन सिलेंडरों का उपयोग व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में खपाने के लिए किया जा रहा है।

याद रखें: उज्ज्वला योजना के तहत लाभार्थियों को ₹300 प्रति सिलेंडर की सब्सिडी मिलती है और साल में 9 सिलेंडर रियायती दर पर दिए जाते हैं।

बाजार का नया ट्रेंड: इंडक्शन और एयर फ्रायर की ‘शॉर्टेज’

गैस की किल्लत ने बिजली उपकरण निर्माताओं की लॉटरी लगा दी है। इंदौर के बाजारों में जो स्टॉक महीने भर चलता था, वह अब महज 2-3 दिन में खत्म हो रहा है।

  1. घरेलू उपभोक्ता: 1.5 से 2 किलोवाट के इंडक्शन, राइस कुकर और एयर फ्रायर खरीद रहे हैं।

  2. होटल व रेस्टोरेंट: कमर्शियल सिलेंडर न मिलने के कारण 5 से 6 किलोवाट के भारी इंडक्शन की तलाश में हैं।

  3. सप्लाई चैन प्रभावित: मांग इतनी अधिक है कि निर्माता और दुकानदार ऑर्डर पूरे नहीं कर पा रहे हैं।

जमीनी हकीकत: कलेक्टर बंगले के पास भी कतारें

मुख्य सचिव के दावों के विपरीत, प्रदेश के छोटे शहरों और कस्बों में हालात तनावपूर्ण हैं।

  • शहडोल: कलेक्टर आवास के पास स्थित गैस एजेंसी पर सुबह से ही लंबी कतारें लग रही हैं, जिससे सड़क पर जाम की स्थिति बन रही है।

  • विंध्य-महाकोशल: यहाँ की एजेंसियों पर धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी का माहौल है। उपभोक्ता घंटों इंतजार के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हैं।

फैक्ट चेक: क्या है उज्ज्वला योजना का गणित?

सुविधा विवरण
कुल सब्सिडी (Ujjwala) ₹300 प्रति रिफिल
वित्तीय सहायता ₹1600 (कनेक्शन/रेगुलेटर हेतु)
कोटा 9 सब्सिडी वाले सिलेंडर प्रति वर्ष
नया विकल्प कमर्शियल इंडक्शन (5-6 KW)

निष्कर्ष: सरकारी दावे बनाम जनता का संघर्ष

एक तरफ मुख्य सचिव का आश्वासन है कि 24 घंटे में डिलीवरी होगी, तो दूसरी तरफ गैस एजेंसियों के बाहर लगती मील लंबी कतारें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। फिलहाल, मध्य प्रदेश का किचन अब एलपीजी के ‘फ्लेम’ से हटकर इंडक्शन के ‘करंट’ की ओर मुड़ता दिख रहा है।

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