बरगी बांध हादसे के बाद मध्य प्रदेश में पर्यटन बीमा की कमी उजागर हुई। अन्य राज्यों में बीमा व्यवस्था लागू है, जबकि यहां सुरक्षा और कवरेज सुधार की जरूरत …और पढ़ें

मध्य प्रदेश में पर्यटन सुरक्षा और बीमा व्यवस्था पर गंभीर सवाल। (फाइल फोटो)
HighLights
- बरगी हादसे ने पर्यटन सुरक्षा और बीमा की कमी उजागर
- मध्य प्रदेश में पर्यटन टिकट के साथ बीमा अनिवार्य नहीं
- अन्य राज्यों में पर्यटकों को दुर्घटना बीमा कवर मिलता है
भोपाल। बरगी बांध में 30 अप्रैल को हुए दर्दनाक क्रूज हादसे के बाद मध्य प्रदेश में पर्यटन सुरक्षा और बीमा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। महज 200 रुपये का टिकट लेकर क्रूज में सवार हुए पर्यटकों के लिए किसी भी प्रकार का अनिवार्य बीमा प्रावधान नहीं था।
हादसे के बाद सामने आए अनुभवों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में पर्यटन गतिविधियों के दौरान सुरक्षा मानकों और बीमा कवरेज को लेकर अभी भी बड़ी खामियां मौजूद हैं।
बीमा प्रावधान का अभाव
मध्य प्रदेश में पर्यटन गतिविधियों के साथ बीमा को अनिवार्य नहीं किया गया है। इसका परिणाम यह हुआ कि हादसे में प्रभावित पर्यटकों और उनके परिवारों को तत्काल वित्तीय सुरक्षा नहीं मिल सकी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, क्रूज पर लाइफ जैकेट जैसी बुनियादी सुरक्षा व्यवस्थाएं भी पर्याप्त नहीं थीं, जिससे जोखिम और बढ़ गया।
अन्य राज्यों से सीख की जरूरत
देश के कई राज्यों ने इस दिशा में पहले ही ठोस कदम उठाए हैं। केरल ऐसा करने वाला पहला राज्य है, जहां इको-टूरिज्म केंद्रों में टिकट के साथ ही पर्यटकों को दुर्घटना बीमा कवर दिया जाता है। इसके अलावा ओडिशा, गोवा और गुजरात ने भी विभिन्न पर्यटन गतिविधियों के लिए बीमा और सुरक्षा मानकों को लागू किया है।
कैसे काम करती है अन्य राज्यों की व्यवस्था
केरल में इको-टूरिज्म स्थलों पर आने वाले पर्यटकों को पांच लाख रुपये तक का बीमा कवर मिलता है। गोवा में एडवेंचर स्पोर्ट्स और वाटर एक्टिविटी के लिए लाइसेंस प्राप्त ऑपरेटरों द्वारा बीमा अनिवार्य है। वहीं गुजरात में प्रमुख पर्यटन स्थलों पर बुनियादी बीमा और सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है।
मध्य प्रदेश में सुधार की जरूरत
बरगी हादसे ने यह साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश में पर्यटन क्षेत्र में सुरक्षा और बीमा को लेकर तत्काल सुधार की जरूरत है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि टिकट के साथ बीमा को अनिवार्य किया जाए और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन हो, तो ऐसे हादसों में होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।




