भोपाल। एयरपोर्ट और सरकारी विभागों में गाड़ियां अटैच कराने का लालच देकर किसानों और वाहन मालिकों को भोपाल के ठगों ने धोखाधड़ी का शिकार बनाया। आकर्षक मासिक किराये के झांसे में लोगों ने किश्तों पर 25 से 30 लाख रुपये कीमत की लग्जरी गाड़ियां खरीदीं, लेकिन न उन्हें किराया मिला और न ही उनकी गाड़ियां वापस मिलीं।
गिरोह ने इन महंगी गाड़ियों को महज 2.5 से 3.5 लाख रुपये में बेच दिया। थाना अयोध्यानगर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए गिरोह के एक सदस्य को गिरफ्तार किया है, जबकि वाहन बेचने वाला मुख्य आरोपित अभी फरार है। पुलिस ने आरोपित की निशानदेही पर करीब 80 लाख रुपये कीमत के पांच वाहन बरामद किए हैं।
पुलिस ने क्या कहा
थाना प्रभारी महेश लिल्हारे ने बताया कि 12 अप्रैल 2026 को टीकमगढ़ निवासी मनोज मिश्रा ने शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि आरोपित आलोक चौबे उनका रिश्तेदार है। उसने खुद को एयरपोर्ट से जुड़ा बताते हुए उनकी एसयूवी को किराये पर लगाने का प्रस्ताव दिया। हर महीने 45 हजार रुपये किराया और 35 हजार रुपये जमानत तय हुई।
शुरुआत में एक महीने का किराया देकर आरोपित ने विश्वास जीत लिया, लेकिन इसके बाद उसने भुगतान बंद कर दिया और गाड़ी को बेच दिया।
जांच में सामने आया कि यह गिरोह योजनाबद्ध तरीके से सागर, दमोह और टीकमगढ़ जिलों के किसानों और वाहन मालिकों को निशाना बनाता था। आरोपित आलोक पहले रिश्तेदारों और परिचितों के जरिए संपर्क करता, फिर सरकारी विभाग या एयरपोर्ट में गाड़ी लगवाने और 35 से 65 हजार रुपये मासिक आय का भरोसा दिलाता था।
किराये के अनुबंध किए जाते थे
भरोसा बढ़ाने के लिए किराये के अनुबंध किए जाते, सिक्योरिटी राशि ली जाती और गाड़ियों में जीपीएस या हूटर लगाने जैसी बातें कही जाती थीं। उसका साथी अरविंद मिश्रा इन वाहनों के लिए खरीदार ढूंढता था।
कार मिलने के बाद उन्हें भोपाल लाया जाता और वाहन मालिक की आर्थिक मजबूरी का हवाला देकर औने-पौने दामों में बेच दिया जाता था। आरोपित फर्जी विक्रय अनुबंध तैयार कर गाड़ियों का सौदा करते थे। इसमें 30-30 लाख रुपये के वाहन 3 से 4 लाख रुपये में बेचे गए।
ठगी को अंजाम देना कबूल किया
थाना प्रभारी लिल्हारे के अनुसार गिरफ्तार आरोपित आलोक चौबे (25), निवासी कोलार रोड, अमरावत कला, ने पूछताछ में अपने साथी अरविंद मिश्रा और नर्मदा के साथ मिलकर इस ठगी को अंजाम देना कबूल किया है।
पुलिस को आशंका है कि इस गिरोह ने और भी कई वाहन इसी तरह बेचे हैं। फिलहाल पुलिस फरार आरोपितों की तलाश में जुटी है और पूरे नेटवर्क की गहन जांच कर रही है।
सरकारी विभाग में अटैच करने की थी तैयारी
जांच में यह भी सामने आया कि ठगी कर सस्ते दामों में बेचे गए कुछ वाहनों को सरकारी विभागों में अटैच करने की तैयारी थी। ठगों ने दो वाहन कमलानगर क्षेत्र में रहने वाले एक ट्रैवल एजेंसी संचालक को बेचे थे, जो एक वाहन को विदिशा कलेक्ट्रेट में अटैच करने की तैयारी कर रहा था। उसने वाहन पर सायरन और मध्य प्रदेश शासन की नंबर प्लेट भी लगवा रखी थी।




