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भू-माफियाओं का नया खेल, शहर से सटे खेतों में बिना TNCP अनुमति के काटी जा रही हैं अवैध कॉलोनियां

 

भोपाल शहर से सटे क्षेत्रों में खेतों की जमीन पर बिना अनुमति (टीएनसीपी/ नगर निगम) प्लॉट काटकर अवैध कॉलोनियां बेचना एक बड़ा संगठित अपराध बन गया है। …और पढ़ें

भू-माफियाओं का नया खेल, शहर से सटे खेतों में बिना TNCP अनुमति के काटी जा रही हैं अवैध कॉलोनियां

खेतों में बिना TNCP अनुमति के काटी जा रही हैं अवैध कॉलोनियां (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. मध्य प्रदेश में अवैध कॉलोनियों का संगठित अपराध बढ़ रहा है
  2. बिना TNCP अनुमति के काटी जा रही हैं अवैध कॉलोनियां
  3. भोपाल से लेकर इंदौर-ग्वालियर तक अवैध प्लॉटिंग का जाल

भोपाल। मध्य प्रदेश में शहरों के अनियोजित विकास का एक बड़ा कारण अवैध कॉलोनियां भी हैं। शहर के नगरीय क्षेत्र में प्रॉपर्टी के दामों में जमकर वृद्धि होने के बाद से आमजन अब मकान, प्लॉट, फार्म हाउस खरीदने के लिए शहर की सीमा से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में निवेश कर रहे हैं। यही कारण है कि बड़े-बड़े बिल्डर यहां स्थित जमीनों के मालिक यानी किसानों के साथ मिलकर बिना अनुमति के अवैध कॉलोनियां काटकर प्लॉट बेच रहे हैं।

कॉलोनाइजर खेत में केवल मुरम की सड़क डालकर प्लाट बेच देते हैं, वहां बिजली, पानी, सीवर और पक्की नाली जैसी कोई सुविधा नहीं होती। न टीएनसीपी की स्वीकृति न कालोनी विकास अनुमति ली जाती है। बस खरीदार को बदले में एक रजिस्ट्री थमा दी जाती है। जिसके बाद अवैध कालोनी में बिल्डरों से खरीदी गई जमीन या भवन के लिए बिजली, पानी, सड़क, सीवेज सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर लगाना पड़ते हैं।

 

शहर से सटे क्षेत्रों में खेतों की जमीन पर बिना अनुमति (टीएनसीपी/ नगर निगम) प्लाट काटकर अवैध कालोनियां बेचना एक बड़ा संगठित अपराध बन गया है। भू-माफिया आम लोगों को सस्ते और आसान प्लाट के नाम पर झांसा देते हैं। इन कालोनियों में जमीन की रजिस्ट्री या डायवर्सन (चेंच आफ लैंड यूज) नहीं होता, जिससे भविष्य में खरीदारों को मकान बनाने में भारी कानूनी अड़चन आती है।

कलेक्टर ने 113 लोगों पर एफआइआर के दिए थे निर्देश, अब तक नहीं हुई कार्रवाई

भोपाल में पिछले वर्ष अक्टूबर में अवैध प्लाटिंग करने वाले कालोनाइजरों को चिह्नित कर नोटिस देते हुए अनुमतियों के दस्तावेज मांगे गए थे लेकिन यह कलेक्टर न्यायालय में पेश नहीं कर सके। जिसके बाद तत्कालीन कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने बिल्डर व किसान सहित 113 लोगों पर एफआइआर दर्ज करने के निर्देश दिए थे। कलेक्टर न्यायालय द्वारा इनकी सूची बनाकर एसडीएम को थमा दी गई थी लेकिन अब तक न तो एफआइआर दर्ज की गई न कोई कार्रवाई की।

प्लान खरीदने वालों को यह देना चाहिए ध्यान

भोपाल के अलावा इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर जैसे महानगरों में भी शहरी सीमा से लगे खेतों पर व्यापक पैमाने पर प्लाटिंग की जा रही है। आप भी यदि प्लाट या भवन खरीदार खरीद रहे हैं, तो कुछ बातों की जांच कर लेनी चाहिए। जैसे टीएनसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) से कालोनी का लेआउट पास है या नहीं। संबंधित नगरीय निकाय से विकास अनुमति ली या नहीं इन दस्तावेजों को चेक कर लेना चाहिए।

अवैध कॉलोनियों पर अधिकारी मौन

अवैध कालोनियों पर कार्रवाई करने के मामले में अपर मुख्य सचिव संजय दुबे से लेकर कोई अधिकारी आधिकारिक बयान नहीं दे रहे हैं। सभी संबंधित अधिकारियों को मैसेज भी भेजे गए लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

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