भोपाल शहर की कोहेफिजा थाना पुलिस ने बंगाल के रास्ते नकली नोटों की तस्करी और उसे राजधानी में खपा रहे सैफुल इस्लाम नाम के एक व्यक्ति को पकड़ा है। इसके प …और पढ़ें

साइबर ठगों की तलाश में पुलिस को मिला नकली नोटों का सौदागर (AI से जनरेट इमेज)
HighLights
- ठगों को खाता उपलब्ध करा चुके एक व्यक्ति की शिकायत पर हो रही थी जांच
- आरोपित के कमरे में मिले असली जैसे लगते 500-500 के 280 नोट
- महीनों से राजधानी के बाजारों में खपा रहा था नोट, पुलिस को भनक तक नहीं थी
भोपाल। शहर की कोहेफिजा थाना पुलिस ने बंगाल के रास्ते नकली नोटों की तस्करी और उसे राजधानी में खपा रहे सैफुल इस्लाम नाम के एक व्यक्ति को पकड़ा है। इसके पास से एक लाख 40 हजार रुपये के नकली नोट मिले हैं। आरोपित पिछले दो-तीन महीनों से राजधानी के बाजारों में नकली नोट खपा रहा था, लेकिन पुलिस को इसकी भनक नहीं लगी। संयोग से साइबर ठगी के एक मामले की जांच के दौरान नकली नोटों का यह सौदागर पकड़ में आ गया।
दरअसल आरोपित सैफुल इस्लाम साइबर ठगी में भी लिप्त रहा है। वह साइबर ठगों को बैंक खाते बेचता और इसी अपराध की वजह से पुलिस उस तक पहुंची। पिछले मंगलवार को यश जायसवाल नामक युवक ने कोहेफिजा थाने में उसकी शिकायत की थी।
उसने पुलिस को बताया कि सैफुल ने एक मित्र के माध्यम से संपर्क कर सहायता के बहाने उससे बैंक खाते का ब्यौरा मांगा था। बाद में उसने उसमें कहीं से कुछ रकम ट्रांसफर करवाई। वह रकम आने के बाद से ही उसका बैंक खाता होल्ड कर दिया गया है। बैंक में उसने पूछताछ की तो मालूम हुआ कि बैंक खाते का उपयोग साइबर ठगी में किया गया है।
पुलिस ने इस लीड के आधार पर जांच शुरू की। पुलिस को सैफुल की तलाश थी। कुछ देर में पुलिस को उसी युवक द्वारा नकली नोट खपाने की सूचना मिली थी। पुलिस टीम ने जब उसके शाहपुरा स्थित किराये के घर पर दबिश दी तो वहां से कई देशी-विदेशी सिम और कई बैंक खातों के दस्तावेज मिले। कोहेफिजा पुलिस को उसके पास से यूके की एक सिम भी मिली है। जिससे वह साइबर ठगों से संपर्क करता था। उसका तर्क है कि इस नंबर से पुलिस उसे ट्रेस नहीं कर पाती।
एक ही सीरियल नंबर के कई नोट मिले
कोहेफिजा थाना प्रभारी कृष्ण गोपाल शुक्ला का कहना है कि आरोपित के पास तलाशी में एक लाख 40 हजार रुपये के 280 नकली नोट मिले थे। हालांकि पहली नजर में नोट बिल्कुल असली जैसे प्रतीत हो रहे थे। इसकी प्रिंटिंग उच्च गुणवत्ता की थी। जब नोट की गड्डियों की जांच की गई तो कई सारे नोट एक ही सीरियल नंबर के दिखाई दिए। जिसके बाद पुलिस ने गहराई से जांच की और इसे नकली नोट के तौर पर पहचाना।




