अब आयुष्मान योजना में इलाज सिर्फ कागजी रिकॉर्ड के आधार पर नहीं चलेगा। धोखाधड़ी और फर्जी क्लेम को रोकने के लिए सरकार ने टियर-1, टियर-2 और टियर-3 शहरों के लिए नया डिजिटल पैकेज सिस्टम लागू कर दिया है।
अब अस्पतालों को यह डिजिटल रिकॉर्ड में दर्ज करना होगा कि मरीज कब अस्पताल पहुंचा, उसकी हालत कितनी गंभीर थी और उसकी कौन-कौन सी जांचें की गईं।
नए नियमों और सुविधाओं का पूरा विश्लेषण
1. हादसों के लिए ‘गोल्डन ऑवर पैकेज’ की शुरुआत
– सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर इमरजेंसी मरीजों के लिए पहली बार ‘गोल्डन ऑवर पैकेज’ लागू किया गया है।
– एक्सीडेंट के बाद पहले घंटे के इलाज के लिए अस्पतालों को अलग से विशेष पैकेज मिलेगा।
– इस पैकेज में मरीज को तुरंत दी जाने वाली ऑक्सीजन, आईवी फ्लूइड (IV Fluid), इंट्यूबेशन, ट्रॉमा मैनेजमेंट और सभी जरूरी प्राथमिक जांचों को शामिल किया गया है।
2. बर्न केस: जलने की गंभीरता के आधार पर होगा भुगतान
बर्न (झुलसे हुए) मरीजों के इलाज के लिए अब एक समान पैकेज नहीं रहेगा। इसे बर्न प्रतिशत के हिसाब से बांटा गया है।
– 25 से 40% तक जलने पर: 27,750 रुपये तक का पैकेज मिलेगा।
– 60 से 80% तक जलने पर: 67,200 रुपये तक का भारी पैकेज तय किया गया है।
– कंपलसरी अपलोड: क्लेम पास करने के लिए अस्पताल को मरीज की फोटो, इंजरी (चोट) की लाइव जानकारी
और डिस्चार्ज दस्तावेज पोर्टल पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।
3. डायलिसिस मरीजों का बढ़ेगा सत्यापन, फर्जी क्लेम पर रोक
– डायलिसिस कराने वाले मरीजों के क्लेम में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का दायरा बढ़ा दिया गया है।
सूत्रों के अनुसार, इलाज के दौरान मरीजों को कई बार थंब ऑथेंटिकेशन (अंगूठा लगाना) करना पड़ सकता है। हालांकि, आपातकालीन स्थिति में फोटो आधारित सत्यापन (Photo Authentication) का विकल्प भी मौजूद रहेगा।
एम्बुलेंस और सर्जरी पर भी रहेगी कड़ी नजर
नए नियमों के तहत अब एम्बुलेंस के इस्तेमाल और ऑपरेशनों की भी लाइव ट्रैकिंग की जाएगी:
– बेसिक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस: इसके लिए 500 रुपये का पैकेज तय किया गया है।
– एडवांस कार्डियक लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस: इसके लिए 1000 रुपये तक का पैकेज मिलेगा।
– ऑपरेशन का सबूत: अस्पतालों को अब ऑपरेशन थियेटर की फोटो, इंप्लांट का बारकोड और डिस्चार्ज समरी डिजिटल रूप से अपलोड करनी होगी, तभी क्लेम राशि जारी की जाएगी।




