इस नए कानून के तहत अब हर नागरिक और संस्थान को अपने परिसर से निकलने वाले कचरे को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर रखना होगा।
इसके साथ ही, यदि किसी घर या संस्थान में जन्मदिन, धार्मिक, सामाजिक या पारिवारिक कार्यक्रम में 100 से अधिक लोग शामिल हो रहे हैं, तो आयोजक को कार्यक्रम से 3 दिन पहले नगर निगम से बकायदा अनुमति लेनी होगी।
ऐसा न करने या बिना छंटनी किए 100 किलोग्राम से अधिक कचरा मिक्स करके फेंकने पर 150 प्रतिशत तक जुर्माना वसूला जाएगा।
अब आपको ऐसे करना होगा वेस्ट मैनेजमेंट (4 डस्टबिन का गणित)
नए नियमों के अनुसार, हर घर और प्रतिष्ठान को कचरा इन चार अलग-अलग डस्टबिन में ही वर्गीकृत करना होगा:
1. गीला कचरा : रसोई का भोजन, फल-सब्जियों के छिलके और पेड़-पौधों की हरी पत्तियां।
2. सूखा कचरा : रद्दी कागज, गत्ते, प्लास्टिक, धातु, कांच की बोतलें और फटे-पुराने कपड़े।
3. सैनिटरी कचरा : डायपर, सैनिटरी नैपकिन, टिशू पेपर और घरेलू स्तर का मेडिकल वेस्ट।
4. घरेलू ई-वेस्ट : पुराने मोबाइल, चार्जर, बैटरियां, बल्ब, घरेलू केमिकल और एक्सपायर्ड दवाइयां।
बड़े आवासीय और व्यावसायिक परिसरों के लिए कड़े मानदंड
शहर के करीब 2,000 बड़े परिसर सीधे इस नियम के दायरे में आएंगे। इसके लिए नगर निगम ने ‘बल्क वेस्ट जनरेटर’ (ज्यादा कचरा पैदा करने वाले) की सीमाएं तय कर दी हैं:
– आवासीय भवन : कुल फ्लोर एरिया 20,000 वर्गमीटर या उससे अधिक
– होटल, रेस्टोरेंट या बाजार : कुल फ्लोर एरिया 5,000 वर्गमीटर या उससे अधिक
– प्रतिदिन पानी की खपत : 40,000 लीटर या उससे अधिक
– प्रतिदिन उत्पन्न ठोस कचरा: 100 किलोग्राम या उससे अधिक
परिषद की बैठक में तीखी बहस; डिजिटल ट्रैकिंग से सुधरेगी व्यवस्था
इस नए प्रस्ताव को लेकर नगर निगम परिषद की बैठक में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस भी देखने को मिली। विपक्ष ने शहर की वर्तमान सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए, जबकि महापौर ने दावा किया कि नए नियमों से सफाई व्यवस्था को एक नए मुकाम पर ले जाया जाएगा।
50% कम होगा लैंडफिल का कचरा: निगम कमिश्नर संस्कृति जैन के अनुसार, वर्तमान में आदमपुर खंती में रोजाना 850 टन कचरा पहुंचता है। अगर लोग घरों में ही कचरे की छंटनी शुरू कर देंगे, तो लैंडफिल साइट पर पहुंचने वाला कचरा सीधे 50% तक कम हो जाएगा।
डिजिटल ट्रैकिंग और रजिस्ट्रेशन: सभी बल्क वेस्ट जनरेटर्स को निगम के पोर्टल पर अनिवार्य पंजीकरण कराना होगा। कचरा उठाने वाले वाहनों की डिजिटल ट्रैकिंग की जाएगी और शिकायत निवारण की व्यवस्था भी ऑनलाइन होगी।
राजस्व वसूली का लक्ष्य अधूरा: ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से इस वर्ष निगम को 104 करोड़ रुपये का राजस्व मिलना था, लेकिन अब तक केवल 38.43 करोड़ रुपये की ही वसूली हो सकी है।




