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भोपाल में ‘खाकी’ का इकबाल खत्म, बीच सड़क पर ‘नवदुनिया’ के पत्रकार को चाकू की नोक पर बनाया बंधक, 32 हजार की लूट

 

भोपाल के निशातपुरा क्षेत्र में बदमाशों ने नवदुनिया-नईदुनिया कर्मचारी को चाकू की नोक पर बंधक बनाकर 32 हजार रुपये लूट लिए। घटना ने पुलिस गश्त और कमिश्नर …और पढ़ें

 

भोपाल में 'खाकी' का इकबाल खत्म, बीच सड़क पर 'नवदुनिया' के पत्रकार को चाकू की नोक पर बनाया बंधक, 32 हजार की लूट

भोपाल में ‘खाकी’ का इकबाल खत्म। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. निशातपुरा में पत्रकार कर्मी को बनाकर बंधक लूटपाट की।
  2. चाकू की नोक पर 32 हजार रुपये वसूले गए।
  3. ऑनलाइन ट्रांसफर कराकर बदमाशों ने रकम अपने खातों में।

भोपाल। राजधानी में कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद भी अपराधों का ग्राफ रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस का खौफ बदमाशों के दिलों से इस कदर खत्म हो चुका है कि अब लोकतंत्र का चौथा स्तंभ भी सुरक्षित नहीं है।

शहर की पुलिस रात में गश्त के बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन हकीकत यह है कि रात के अंधेरे में सड़कें बदमाशों के हवाले होती हैं। इसका जीता-जागता प्रमाण बीती रात निशातपुरा थाना क्षेत्र में देखने को मिला, जहां बेखौफ बदमाशों ने ‘नवदुनिया-नईदुनिया’ के कर्मचारी अनुज की गर्दन पर चाकू अड़ाकर उन्हें सरेराह बंधक बना लिया और 32 हजार रुपये लूट लिए।

 

यूं दिया वारदात को अंजाम, निशातपुरा पुलिस नदारद

घटना रात करीब साढ़े बारह बजे की है, जब अनुज अपना कार्य समाप्त कर घर लौट रहे थे। निशातपुरा थाना क्षेत्र पार करते ही एक युवक ने उनसे लिफ्ट मांगी। लिफ्ट न देने पर एक बदमाश उनकी गाड़ी के सामने कूद गया, जिससे गाड़ी अनियंत्रित हो गई और अनुज गिर गए। इसके तुरंत बाद वहां पहले से घात लगाए बैठे तीन अन्य बदमाश आ गए। उन्होंने अनुज की गर्दन पर चाकू अड़ा दिया और उन्हें सड़क से उठाकर पास के ही एक कमरे में बंधक बनाकर ले गए।

सोचने वाली बात यह है कि मुख्य मार्ग पर इतनी बड़ी वारदात हो गई और पुलिस की गश्ती गाड़ियां नदारद थीं। निशातपुरा थाना पुलिस क्या सिर्फ कागजों पर ही गश्त कर रही है?

जान से मारने की धमकी देकर करवाए ऑनलाइन ट्रांसफर

कमरे में बंधक बनाने के बाद बदमाशों ने अनुज से पैसों की मांग की। नकद पैसे न होने पर बदमाशों ने उन्हें डरा-धमका कर उनके परिचितों (प्रशांत व अन्य) से ऑनलाइन पैसे मंगवाए। इस तरह बदमाशों ने कुल 32,000 रुपये ट्रांसफर करवा कर लूट की इस खौफनाक वारदात को अंजाम दिया।

वारदात के मुख्य बिंदु, जो पुलिस महकमे को आईना दिखाते हैं

चेकिंग के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति: रात के समय पुलिस आम जनता को रोककर बेवजह परेशान करती है, लेकिन चार बदमाश हथियार लेकर खुलेआम घूमते हैं, एक व्यक्ति को उठाकर कमरे में ले जाते हैं और पुलिस को भनक तक नहीं लगती।

इंटेलिजेंस पूरी तरह फेल: थाना क्षेत्र की झुग्गियों में कौन से सक्रिय अपराधी पल रहे हैं, इसकी कोई सूचना पुलिस के बीट प्रभारियों और मुखबिर तंत्र के पास नहीं है।

कमिश्नरी सिस्टम पर तमाचा: राजधानी में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू होने का उद्देश्य ही त्वरित कार्रवाई और अपराधों पर लगाम लगाना था, लेकिन इस घटना ने पूरे सिस्टम की बखिया उधेड़ कर रख दी है।

आरोपियों की पहचान हुई, लेकिन गिरफ्त से दूर

  • घटना के बाद वरिष्ठ अधिकारियों (डीसीपी और टीआई) को सूचना दी गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच की और पास की झुग्गी में रहने वाले आरोपियों की पहचान कर ली। पुलिस आरोपियों के घर भी गई, लेकिन वे सभी मौके से फरार हो गए। मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है।
  • गर्दन पर चाकू लगाकर बंधक बनाना और फिर लूट की घटना को अंजाम देना यह बताता है कि अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं। सवाल यह है कि पहचान होने के बाद भी क्या पुलिस इन लुटेरों को जल्द पकड़ पाएगी?
  • वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को अब वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर जमीनी हकीकत देखनी होगी, अन्यथा भोपाल को ‘अपराधों की राजधानी’ बनने से कोई नहीं रोक सकेगा। पुलिस को अब अपनी कुंभकर्णी नींद से जागकर यह साबित करना होगा कि शहर में कानून का राज है, न कि चाकूबाज गुंडों का।
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