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भोपाल में टैक्स की हेराफेरी पर कसेगा शिकंजा; कर वसूली में गड़बड़ियों के बाद नगर निगम ने तय किए अधिकारियों के अधिकार

भोपाल नगर निगम की बड़ी कार्रवाई: टैक्स गड़बड़ी रोकने के लिए तय की नई वित्तीय सीमाएं, अधिकारियों के अधिकार बदले

Publisher: Agrasar India

Publish Date: Mon, 13 Jul 2026 | 12:45 PM (IST)

Highlights

  • सख्त कदम: संपत्तिकर निर्धारण और कर कटौती में सामने आई अनियमितताओं के बाद निगम प्रशासन सख्त।

  • अधिकारों का दायरा: टैक्स संशोधन और कर कम करने के लिए नई वित्तीय अधिकार-सीमाएं तय।

  • टाइम लिमिट: टैक्स संबंधी सामान्य मामलों का 7 कार्य दिवस में निराकरण करना अनिवार्य।

डिजिटल डेस्क, भोपाल। भोपाल नगर निगम में संपत्तिकर (Property Tax) की वसूली और टैक्स निर्धारण में बड़े पैमाने पर सामने आई गड़बड़ियों के बाद निगम प्रशासन ने बड़ा एक्शन लिया है। टैक्स संशोधन और कर कम करने की प्रक्रिया को पूरी तरह नियंत्रित और पारदर्शी बनाने के लिए एक नया शक्ति आदेश जारी किया गया है।

हाल ही में मिली शिकायतों में सामने आया था कि कुछ स्तरों पर मनमाने ढंग से संपत्तिकर की राशि कम की जा रही थी। इन अनियमितताओं पर लगाम कसने के लिए निगम आयुक्त संस्कृति जैन ने अधिकारियों की वित्तीय सीमाएं तय करते हुए सख्त आदेश जारी किए हैं। नए नियमों के तहत यदि किसी भी स्तर पर अब लापरवाही या हेरफेर पाई गई, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ सीधे अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

समय सीमा में करना होगा निपटारा

नए आदेश में केवल वित्तीय सीमाएं ही तय नहीं की गई हैं, बल्कि काम की समय-सीमा (Deadlines) भी बांधी गई है। अब वार्ड और जोन कार्यालयों में आने वाले टैक्स आवेदनों पर दो कार्य दिवस के भीतर शुरुआती कार्रवाई शुरू करनी होगी।

सामान्य प्रकरणों का 7 कार्य दिवस के भीतर अंतिम निराकरण करना अनिवार्य होगा। हालांकि, जिन मामलों में मौके पर जाकर भौतिक निरीक्षण (Physical Verification) की जरूरत होगी, उनके निपटारे के लिए अधिकतम एक महीने का समय दिया गया है।

टैक्स संशोधन: किस अधिकारी को मिला कितना अधिकार?

कर संशोधन/कटौती की राशि निर्णय लेने का अधिकृत प्राधिकारी
12,000 रुपये तक संबंधित जोनल अधिकारी (जोन 1 से 21)
12,000 से 50,000 रुपये तक संबंधित जोन के सहायक आयुक्त / प्रभारी राजस्व अधिकारी (विधानसभावार)
50,000 से 2.50 लाख रुपये तक संबंधित विधानसभा क्षेत्र के नोडल अधिकारी
2.50 लाख रुपये से अधिक अपर आयुक्त (राजस्व) के माध्यम से अंतिम निर्णय हेतु आयुक्त के समक्ष प्रस्तुत

क्यों पड़ी इस बदलाव की जरूरत?

नगर निगम के राजस्व विभाग में लंबे समय से यह शिकायतें आ रही थीं कि कुछ रसूखदारों और बड़े करदाताओं का टैक्स बिना किसी ठोस आधार के कम कर दिया जाता था। इस नई व्यवस्था से अब कोई भी जोनल अधिकारी बड़े अमाउंट का टैक्स अपनी मर्जी से संशोधित नहीं कर पाएगा। हर स्तर पर जवाबदेही तय होने से निगम के खजाने में होने वाले नुकसान पर रोक लगेगी और आम जनता के काम भी तय समय में पूरे हो सकेंगे।

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