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मध्य प्रदेश में एक लाख से अधिक कर्मचारियों का होगा प्रमोशन, लेकिन इंजीनियरों को लगा बड़ा झटका

एमपी में 10 साल बाद प्रमोशन शुरू, 1 लाख से अधिक कर्मियों को तोहफा; पर इंजीनियरों को लगा बड़ा झटका

Publisher: Agrasar India

Publish Date: Mon, 13 Jul 2026 | 02:30 PM (IST)

Highlights

  • बड़ी राहत: मध्य प्रदेश में 10 साल का लंबा इंतजार खत्म, 1 जुलाई 2026 से शुरू हुई पदोन्नतियां।

  • इंजीनियर मायूस: नए नियमों में योग्यता व वरिष्ठता की विशेष छूट समाप्त, अन्य संवर्गों के बराबर लाया गया।

  • कोर्ट में सुनवाई: 2025 के नए पदोन्नति नियमों को लेकर आज हाई कोर्ट में अपना पक्ष रखेगी राज्य सरकार।

राज्य ब्यूरो, भोपाल। मध्य प्रदेश के सरकारी महकमों में पिछले एक दशक से थमा पदोन्नति (प्रमोशन) का पहिया आखिरकार 1 जुलाई 2026 से घूम गया है। इस ऐतिहासिक फैसले से सूबे के 1 लाख से अधिक अधिकारी-कर्मचारियों को प्रमोशन का तोहफा मिलने जा रहा है। हालांकि, इस बड़ी खुशखबरी के बीच सरकारी इंजीनियरों को एक बड़ा झटका लगा है। सरकार ने 10 साल पहले इंजीनियरों को दी गई वह विशेष छूट समाप्त कर दी है, जिसके तहत उन्हें द्वितीय से प्रथम श्रेणी के पदों पर ‘योग्यता सह वरिष्ठता’ (Merit-cum-Seniority) के आधार पर तेजी से पदोन्नति मिलती थी। ‘मध्य प्रदेश पदोन्नति नियम 2025’ के लागू होने से अब इंजीनियरों को भी उसी सामान्य प्रक्रिया से गुजरना होगा, जो अन्य विभागों के द्वितीय श्रेणी अधिकारियों के लिए तय है।

क्यों दी गई थी छूट और अब क्यों ली गई वापस?

दरअसल, लोक निर्माण विभाग (PWD) की पहल पर सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) ने साल 2016 में नियमों में संशोधन किया था। मकसद यह था कि बेहतर और तकनीकी रूप से दक्ष प्रदर्शन करने वाले इंजीनियरों को प्रोत्साहित किया जा सके।

विभाग का तर्क (2016) बदलाव का कारण (2025 नियम)
अच्छा काम करने वाले इंजीनियरों को तेजी से प्रमोट कर प्रोत्साहित करना। सभी संवर्गों के लिए एक समान नियम बनाना ताकि कोई कानूनी विवाद न खड़ा हो।
तकनीकी संवर्ग में कार्यकुशलता और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाना। विशेष प्रविधानों के चलते अन्य संवर्गों द्वारा कोर्ट में चुनौती देने का डर था।

सामान्य प्रशासन विभाग का तर्क है कि 10 साल से पदोन्नतियां बंद होने के कारण सभी संवर्गों को भारी नुकसान हुआ है। यदि इंजीनियरों के लिए अलग से विशेष प्रविधान रखे जाते, तो अन्य विभागों के कर्मचारी इसे अदालत में चुनौती दे सकते थे। इसी वजह से विवादित प्रविधानों को नए नियमों से बाहर रखा गया है, जिसका फायदा यह हुआ कि हाई कोर्ट में दायर नई याचिकाओं में इस बिंदु पर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई। हालांकि, मैदानी स्तर पर कार्यरत सीनियर इंजीनियरों में इस बदलाव को लेकर भारी निराशा है।

हाई कोर्ट में आज सरकार रखेगी अपना पक्ष

दूसरी तरफ, वर्ष 2025 के इन नए पदोन्नति नियमों को लेकर आज यानी सोमवार, 13 जुलाई 2026 को जबलपुर हाई कोर्ट में बेहद महत्वपूर्ण सुनवाई होनी है। सामान्य पिछड़ा एवं अल्पसंख्यक अधिकारी-कर्मचारी संस्था (सपाक्स) ने नए नियमों के तहत हो रहे प्रमोशनों पर रोक लगाने और पूर्व में सुरक्षित रखे गए फैसलों को जल्द सुनाने के लिए याचिका दायर की है।

इससे पहले, महाधिवक्ता (Advocate General) प्रशांत सिंह की अनुपस्थिति के कारण सरकार ने जवाब देने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था, जिसके बाद कोर्ट ने आज की तारीख तय की थी। पूरे प्रदेश के कर्मचारियों की नजरें आज हाई कोर्ट में होने वाली इस सुनवाई पर टिकी हुई हैं।

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