प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को मानदेय में कटौती से हुए नुकसान की भरपाई के हाई कोर्ट जबलपुर के निर्णय को सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती…और पढ़ें

शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाएगी मोहन सरकार। (AI Generated)
HighLights
- HC की युगलपीठ ने बरकरार रखा था भुगतान का फैसला
- ग्रेच्युटी और मानदेय एरियर पर सरकार का बड़ा कदम
- शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाएगी मोहन सरकार
भोपाल। प्रदेश की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाओं को मानदेय में कटौती से हुए नुकसान की भरपाई के हाई कोर्ट जबलपुर के निर्णय को सरकार सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देगी। दरअसल, भारत सरकार की योजना में 50 प्रतिशत अंशदान राज्य सरकार का रहता है।
आरोप था कि केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2018 में मानदेय बढ़ाया था लेकिन राज्य सरकार ने अपना अंशदान (हिस्सा) कम कर दिया था। इसे चुनौती दी गई थी। हाई कोर्ट ने 2019 से 2023 के बीच काटे गए मानदेय (लगभग 1,400 करोड़ रुपये) का एकमुश्त भुगतान करने और ग्रेच्युटी का लाभ देने का निर्देश दिए।
राज्य सरकार ने घटाया था अपना अंशदान
आंगनबाड़ी संगठन ने मानदेय में कटौती के हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। सरकार ने 2018 में मानदेय बढ़ाया था लेकिन सत्ता परिवर्तन हो गया तो 2019 में राज्य ने अपना अंशदान घटा दिया। 2018 में केंद्र सरकार ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के मानदेय में 1,500 रुपये की बढ़ोतरी की थी। चूंकि, राज्य ने पहले ही मानदेय बढ़ा दिया था, इसलिए उसे समायोजित करते हुए मानदेय का ढांचा संतुलित करने के लिए कटौती का तर्क दिया। हालांकि, इसे न्यायालय ने स्वीकार नहीं किया।
हाई कोर्ट की एकल पीठ ने दिया था आदेश
उल्लेखनीय है कि हाई कोर्ट जबलपुर की एकल पीठ ने कटौती को अवैध बताते हुए जून 2019 से जून 2023 तक के 48 महीने का एरियर छह प्रतिशत ब्याज के साथ भुगतान का आदेश दिया था। साथ ही आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ग्रेच्युटी का लाभ देने के निर्देश भी दिए थे।




