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एमपी में लिव-इन में रहना बिना रजिस्ट्रेशन होगा अपराध, मां-पिता को भी मिलेगी सूचना, समिति ने मुख्यमंत्री को सौंपी UCC की रिपोर्ट

 

मध्य प्रदेश में 20 जुलाई से प्रारंभ होने जा रहे विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा। इसे गुजरात के कानू…और पढ़ें

HighLights

  1. MP विधानसभा के मानसून सत्र में आएगा UCC विधेयक
  2. मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता का खाका तैयार
  3. जस्टिस रंजना देसाई समिति ने मुख्यमंत्री को सौंपी रिपोर्ट

भोपाल। मध्य प्रदेश में 20 जुलाई से प्रारंभ होने जा रहे विधानसभा के मानसून सत्र में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा। इसे गुजरात के कानून की तरह तैयार किया गया है। सेवानिवृत्त न्यायाधीश रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाली समिति ने यूसीसी की रिपोर्ट को अंतिम रूप देकर सोमवार देर शाम मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को सौंप दिया। इसमें अनुशंसा के साथ जन परामर्श के दो भाग रखे गए हैं। वहीं, विधेयक का प्रारूप भी समिति ने तैयार कर दिया है।

लिव इन संबंधों के लिए बनाए गए कड़े प्रविधान

इसमें लिव इन संबंधों को लेकर कई प्रविधान किए गए हैं। इसका पंजीयन अनिवार्य किया गया है। यदि कोई पंजीयन नहीं कराता है और लिव इन में रहता है तो यह अपराध की श्रेणी में आएगा। लिव इन से यदि कोई अलग होना चाहता है तो उसे रजिस्ट्रार को आवेदन देना होगा। यूसीसी के दायरे में आदिवासी, घुमंतु-अर्द्धघुमंतु और मतांतरित आदिवासी नहीं आएंगे।

 

सूत्रों के अनुसार, यूसीसी की रिपोर्ट पर समिति के सभी सदस्यों ने हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसमें नीतिगत निर्णय के अनुसार आदिवासियों को बिल्कुल भी नहीं छेड़ा गया है। ये सभी यूसीसी के दायरे से बाहर रखेंगे। विवाह और विवाह विच्छेद के लिए सबके लिए एक जैसे प्रविधान रखेंगे। किसी को कोई विशेषाधिकार नहीं रहेगा।

संतान को मिलेंगे सभी उत्तराधिकार

लिव इन संबंधों को प्रविधान प्रस्तावित किया गया है कि इसमें रहने वालों को पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। यदि कोई बिना पंजीयन लिव इन में रहता है और इसका जानकारी मिलती है तो आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाएगा। पंजीयन कराने पर इसकी सूचना संबंधित थाने और स्वजन को दी जाएगी यानी कोई चोरी छुपे नहीं रह सकेगा।

यदि दोनों के बीच अनबन हो जाती है या स्वेच्छा से अलग होना चाहते हैं तो इसके लिए भी पंजीयन जैसी ही व्यवस्था रहेगी यानी रजिस्ट्रार के यहां आवेदन देना होगा। लिव इन में जन्मी संतान को सभी उत्तराधिकार मिलेंगे। इसके साथ ही यह प्रविधान भी किया गया है कि बच्चे की संपत्ति माता-पिता, दोनों को मिलेगी। पति की मृत्यु होने पर हक मां का रहेगा।

रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद आगे की प्रक्रिया

समिति द्वारा रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद इसे सरकार स्वीकार करेगी। विधि एवं विधायी विभाग विधेयक के प्रारूप को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली वरिष्ठ सचिव समिति के समक्ष विचार के लिए रखेगा। यहां से हरी झंडी मिलने पर कैबिनेट के अनुमोदन से विधेयक विधानसभा में प्रस्तुत किया जाएगा।

विधानसभा से पारित होने पर राज्यपाल की अनुमति से सरकार राष्ट्रपति की अनुमति के लिए भेजेगी। यहां से अनुमोदन होने यह लागू होगा। सूत्रों का कहना है कि इस प्रक्रिया में चार-पांच माह लग सकते हैं। इसके बाद नियम बनेंगे।

यूसीसी लागू करने वाला चौथा राज्य होगा मप्र

मध्य प्रदेश यूसीसी लागू करने वाला देश का चौथा राज्य होगा। उत्तराखंड में इसे लागू किया जा चुका है। गुजरात और असम विधानसभा से यह पारित हो चुका है और लागू होने की प्रक्रिया में है।

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