एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों का बड़ा विरोध: 3 to 5 महीने से वेतन न मिलने पर 30 हजार कर्मचारी प्रधानमंत्री मोदी को लिखेंगे खून से पत्र
भोपाल: मध्य प्रदेश के सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में सेवाएं दे रहे 30 हजार से अधिक आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारियों का सब्र अब जवाब दे चुका है। पिछले 3 से 5 महीने से वेतन न मिलने से नाराज इन कर्मचारियों ने अब देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खून से पत्र लिखकर अपनी पीड़ा और आक्रोश जाहिर करने का फैसला किया है। ‘मध्य प्रदेश संविदा आउटसोर्स स्वास्थ्य कर्मचारी संघ’ के बैनर तले यह बड़ा आंदोलन शुरू होने जा रहा है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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महीनों से वेतन बकाया: शहडोल में 5 महीने, सीधी-बुरहानपुर में 4 महीने और बैतूल, सागर व ग्वालियर सहित अन्य जिलों में 3 से 5 महीने से वेतन लंबित है। कर्मचारियों का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से पारिश्रमिक न मिलने के कारण आर्थिक तंगी और भुखमरी जैसी स्थिति का सामना करना पड़ रहा है।
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यूपी-हरियाणा की तर्ज पर नीति की मांग: कर्मचारियों ने मांग की है कि ठेका प्रथा को समाप्त कर उत्तर प्रदेश और हरियाणा राज्यों की तर्ज पर मध्य प्रदेश में भी एक स्पष्ट और सुरक्षित आउटसोर्स नीति बनाई जाए।
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एजेंसियों पर घोटाले का आरोप: संघ के प्रदेशाध्यक्ष कोमल सिंह के अनुसार, शासकीय अस्पतालों में काम कर रहे कर्मचारियों का पैसा निजी एजेंसियां दबाए बैठी हैं और श्रम विभाग द्वारा तय न्यूनतम वेतन भी पिछले 8 साल से नहीं दिया जा रहा है।
संकट का दायरा और प्रमुख मांगें
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कर्मचारियों की भूमिका: प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों, सीएचसी (CHC), और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) पर सपोर्ट स्टाफ, डाटा एंट्री ऑपरेटर, वार्ड बॉय, वार्ड आया, ऑक्सीजन टेक्नीशियन, सुरक्षाकर्मी और सफाईकर्मी के रूप में ये 30 हजार कर्मचारी रीढ़ की हड्डी की तरह काम कर रहे हैं।
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प्रमुख मांगें:
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पिछले 5-6 महीने के बकाए वेतन का तुरंत भुगतान और 11 माह का एरियर दिया जाए।
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आउटसोर्स कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 26,000 रुपये प्रति माह निर्धारित किया जाए।
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वेतन अटकाने वाली भ्रष्ट ठेका एजेंसियों को ब्लैकलिस्ट कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो।
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ठेका व्यवस्था को खत्म कर कर्मचारियों का विभागों में संविलियन (समायोजन) किया जाए।
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