एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
भोपाल में समान नागरिक संहिता (UCC) का विरोध: मुस्लिम संगठनों और शहर काजी ने कानून वापस लेने या समाज को दायरे से बाहर रखने की मांग की
भोपाल: देश और प्रदेश में समान नागरिक संहिता (Uniform Civil Code – UCC) को लेकर बहस के बीच अब राजधानी भोपाल में भी इसका विरोध तेज होने लगा है। मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों और प्रमुख संगठनों ने यूसीसी का कड़ा विरोध जताते हुए इसे या तो पूरी तरह वापस लेने या फिर मुस्लिम समाज को इसके दायरे से मुक्त रखने की पुरजोर मांग की है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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शहर काजी की मांग: भोपाल के शहर काजी मुश्ताक अली नदवी ने सरकार के समक्ष मांग रखी है कि समान नागरिक संहिता को वापस लिया जाए। उनका तर्क है कि इस कानून के लागू होने से उनके पर्सनल लॉ और भारतीय संविधान द्वारा प्रदत्त धार्मिक व सांस्कृतिक स्वतंत्रता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
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कानूनी विशेषज्ञों की समीक्षा: शहर काजी ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल समुदाय की ओर से सड़कों पर उतरकर किसी उग्र आंदोलन की कोई योजना नहीं है। इसके बजाय, वरिष्ठ अधिवक्ताओं और कानून के जानकारों की एक विशेष टीम यूसीसी के सभी कानूनी पहलुओं और इसके प्रभावों की बारीकी से समीक्षा कर रही है। साथ ही, समाज के लोगों से अपने पर्सनल लॉ के अधिकारों के प्रति जागरूक रहने की अपील की गई है।
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कलेक्टर को सौंपा गया ज्ञापन: यूसीसी के विरोध में जमीयत उलेमा के एक प्रतिनिधिमंडल ने मौलाना मजीद उद्दीन और वजी उद्दीन के नेतृत्व में भोपाल कलेक्टर को एक आधिकारिक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें इस कानून को वापस लिए जाने की मांग की गई है।
क्या है मुख्य चिंता?
मुस्लिम समुदाय का मानना है कि विवाह (निकाह), तलाक, संपत्ति के बंटवारे (विरासत) और वसीयत जैसे पारिवारिक और नागरिक मामले लंबे समय से उनके पर्सनल लॉ और शरिया कानूनों के तहत संचालित होते आए हैं। समुदाय इन पारंपरिक व्यवस्थाओं को किसी भी बदलाव के बिना पूरी तरह बरकरार रखना चाहता है, जिसे लेकर विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं।




