एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में सड़क सुरक्षा का कड़ा कदम: बिना बीमा वाले वाहनों को पेट्रोल पंप पर नहीं मिलेगा ईंधन, शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
भोपाल: मध्य प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने और यातायात नियमों का कड़ाई से पालन कराने के लिए राज्य सरकार एक बेहद सख्त और अभिनव पहल करने जा रही है। अब प्रदेश में बिना बीमा (Insurance) वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं मिलेगा। सुप्रीम कोर्ट की सड़क सुरक्षा समिति के अध्यक्ष एवं सेवानिवृत्त न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे की अध्यक्षता में मुख्य सचिव कार्यालय में हुई उच्च स्तरीय बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई है, जिसे जल्द ही पायलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू किया जाएगा।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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नंबर प्लेट स्कैन करेंगे कैमरे: इस व्यवस्था को लागू करने के लिए पेट्रोल पंपों पर विशेष हाई-टेक कैमरे लगाए जाएंगे, जिन्हें सीधे ‘वाहन’ (VAHAN) पोर्टल के डेटाबेस से जोड़ा जाएगा। जैसे ही कोई वाहन ईंधन भरवाने पहुंचेगा, कैमरे नंबर प्लेट स्कैन कर बता देंगे कि वाहन का बीमा वैध है या नहीं।
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जीरो फैटेलिटी अभियान का विस्तार: सड़क हादसों में होने वाली मौतों को रोकने के लिए चलाए जा रहे ‘जीरो फैटेलिटी डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम’ का दायरा बढ़ा दिया गया है। पहले इसमें 6 जिले (धार, सतना, रीवा, सागर, जबलपुर, खरगोन) शामिल थे, अब इसमें इंदौर, भोपाल और उज्जैन को भी शामिल कर लिया गया है, जिससे कुल जिलों की संख्या 9 हो गई है।
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सड़क हादसों के आंकड़े: आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, मध्य प्रदेश में हर साल सड़क हादसों में औसतन 13,000 लोगों की जान जाती है। हालांकि, कड़े सुरक्षा उपायों के चलते साल 2025 की तुलना में 2026 के शुरुआती छह महीनों में लगभग 800 मौतें कम दर्ज की गई हैं।
तकनीक और जनभागीदारी पर जोर
बैठक में जस्टिस अभय मनोहर सप्रे ने निर्देश दिए कि सड़क हादसों को रोकने के लिए केवल पुलिसिया सख्ती या कानून काफी नहीं है, बल्कि इसमें जनभागीदारी भी उतनी ही जरूरी है।
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आवारा पशुओं से बचाव: सड़कों पर आवारा पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए समयबद्ध तरीके से ठोस कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।
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घायलों का रिस्पांस टाइम: वर्तमान में शहरी क्षेत्रों में दुर्घटना के बाद घायल को अस्पताल पहुंचाने का औसत समय (रिस्पांस टाइम) करीब 16 मिनट है, जिसे प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग मिलकर और कम करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं ताकि अधिक से अधिक कीमती जानें बचाई जा सकें।




