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MP में हर साल निकल रहा 5000 टन ई-वेस्ट, मोबाइल-कंप्यूटर जलाने का आरोप; NGT ने मांगा जवाब

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

मध्य प्रदेश में ई-कचरे और सीवेज प्रबंधन पर एनजीटी की सख्त चिंता: भोपाल में अवैध ई-वेस्ट इकाइयों और अनुपचारित पानी पर कार्रवाई के निर्देश

भोपाल: मध्य प्रदेश में ई-कचरे (E-Waste) और सीवेज प्रबंधन की बदहाल स्थिति को लेकर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने गंभीर चिंता जताई है। राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश में अनधिकृत ई-वेस्ट इकाइयों द्वारा इलेक्ट्रॉनिक कचरे को खुले में जलाने और अनुपचारित सीवेज के सीधे नदियों में मिलने के मामलों पर एनजीटी ने कड़ा रुख अपनाया है। अधिकरण ने राज्य के संबंधित विभागों और अधिकारियों को नोटिस जारी कर चार सप्ताह के भीतर तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की है।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • 6 साल में 17 गुना बढ़ा ई-कचरा: याचिकाकर्ता नितिन सक्सेना द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मध्य प्रदेश में हर साल करीब 5,000 टन ई-कचरा निकल रहा है, जबकि 2019 में यह आंकड़ा मात्र 500 टन था। इसमें अकेले भोपाल से 415 टन, इंदौर से 800 टन, ग्वालियर से 400 और उज्जैन से 315 टन ई-कचरा शामिल है।

  • भोपाल में अवैध इकाइयां सक्रिय: राजधानी में निकलने वाले ई-कचरे का मात्र 10 प्रतिशत हिस्सा ही वैज्ञानिक तरीके से निपटाया जाता है। शहर में करीब 250 अनधिकृत कबाड़ इकाइयों में मोबाइल और कंप्यूटर जैसे उपकरणों को खुले में तोड़ा व जलाया जा रहा है, जिससे सीसा, पारा और कैडमियम जैसी जहरीली धातुएं पर्यावरण में घुल रही हैं।

  • स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा: असुरक्षित ई-कचरे के निपटारे और प्रदूषित हवा के कारण बच्चों और गर्भवती महिलाओं में श्वसन संबंधी बीमारियां और न्यूरो-डेवलपमेंट प्रभावित होने का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।

  • 5 सदस्यीय समिति गठित: एनजीटी ने मामले की जांच के लिए पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसे चार सप्ताह में रिपोर्ट देनी होगी। मामले की अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को होगी।

सीवेज प्रबंधन की स्थिति भी बेहद चिंताजनक

एनजीटी के आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश के शहरों में रोजाना 2183.7 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) सीवेज उत्पन्न होता है। इसके मुकाबले कुल उपचार क्षमता 1311.99 एमएलडी है, लेकिन धरातल पर वास्तविक रूप से केवल 696.03 एमएलडी सीवेज का ही शोधन हो रहा है यानी उपलब्ध क्षमता का आधा हिस्सा ही उपयोग में आ रहा है।

अधिकरण ने नदियों और जलस्रोतों में सीधे सीवेज मिलने पर गहरी नाराजगी जताते हुए कलेक्टरों और नगर निगमों को एसटीपी (STP) की क्षमता का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।

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