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आयुष्मान भारत योजना पर बड़ा अपडेट, 1 अक्टूबर से इंदौर-भोपाल समेत 4 बड़े शहरों के 289 अस्पताल हो सकते हैं इससे बाहर

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)

भोपाल डेस्क टीम

आयुष्मान योजना के नियमों में कड़ाई: 1 अक्टूबर से भोपाल-इंदौर समेत चार बड़े शहरों के 289 अस्पतालों पर बाहर होने का खतरा, ‘फुल एनएबीएच’ प्रमाण पत्र अनिवार्य

भोपाल: मध्य प्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत मुफ्त इलाज मुहैया कराने वाले निजी अस्पतालों और मरीजों के लिए एक बेहद अहम अपडेट सामने आया है। राज्य के चार प्रमुख महानगरों—भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर—में आयुष्मान योजना के संचालन के लिए नियमों को और अधिक कड़ा कर दिया गया है। तय रियायत की अवधि समाप्त होने के बाद अब इन शहरों के अस्पतालों के लिए गुणवत्ता मानक कड़े कर दिए गए हैं।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • 30 सितंबर को खत्म हो रही है रियायत: ‘एंट्री लेवल एनएबीएच’ (NABH) के आधार पर सूचीबद्ध अस्पतालों को दी गई 6 महीने की मोहलत आगामी 30 सितंबर को पूरी हो रही है। इसके बाद इन महानगरों में योजना से जुड़े रहने के लिए अस्पतालों के पास ‘फुल एनएबीएच’ (Full NABH) प्रमाण पत्र होना अनिवार्य होगा।

  • 289 अस्पतालों पर मंडराया संकट: यदि निर्धारित समय-सीमा के भीतर ये अस्पताल ‘स्कोप ऑफ सर्विस’ के तहत पूर्ण एनएबीएच मानक हासिल नहीं कर पाते हैं, तो 1 अक्टूबर से इन चारों बड़े शहरों के 289 अस्पताल आयुष्मान योजना की सूची से बाहर (De-empanel) हो सकते हैं।

  • राजधानी भोपाल पर सबसे गहरा असर: इस नए नियम का सबसे बड़ा प्रभाव भोपाल में देखने को मिल रहा है। भोपाल में कुल 163 एनएबीएच मान्यता प्राप्त अस्पताल पंजीकृत हैं, जिनमें से केवल 24 अस्पतालों के पास ही फुल एनएबीएच की पात्रता है। बाकी बचे 139 अस्पताल (लगभग 85%) अभी भी शुरुआती यानी ‘एंट्री लेवल एनएबीएच’ के भरोसे ही चल रहे हैं।

नए नियमों का स्वरूप और अन्य प्रावधान

  • विशेषज्ञता (Speciality) के आधार पर अनिवार्यता: अस्पताल को जिस विशेष उपचार के लिए आयुष्मान योजना की मान्यता मिली है, उसी के अनुरूप उसे अपना फुल एनएबीएच सर्टिफिकेट दिखाना होगा।

  • अन्य जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों के लिए राहत: महानगरों को छोड़कर राज्य के अन्य जिलों में अस्पतालों के लिए फिलहाल ‘एंट्री लेवल एनएबीएच’ की व्यवस्था ही जारी रहेगी। हालांकि, इसके लिए जिला गुणवत्ता प्रत्यायन मूल्यांकन समिति (DQACC) की प्रक्रिया में कम से कम 70 अंक का स्कोर लाना आवश्यक होगा। इसके अलावा, ट्राइबल (आदिवासी) क्षेत्रों के अस्पतालों को इस अनिवार्यता से छूट दी गई है, जहां बिना एनएबीएच मान्यता के भी आयुष्मान योजना के तहत इलाज की सुविधा अनवरत जारी रहेगी।

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