एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
पेंच टाइगर रिजर्व के तोतलाडोह जलाशय में सक्रिय मछली माफिया: जलीय जीवों और वन्यजीवों पर मंडराया खतरा; एनटीसीए ने मांगी रिपोर्ट
भोपाल: पेंच टाइगर रिजर्व के तोतलाडोह जलाशय में सक्रिय मछली माफिया न केवल जलीय जीवों के अस्तित्व के लिए खतरा बन गए हैं, बल्कि वन्यप्राणियों की सुरक्षा के सामने भी एक बड़ी चुनौती खड़े कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के प्रतिबंध के बावजूद यहां अवैध तरीकों से मछली के शिकार की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में शिकायत पहुंचने के बाद राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) ने मध्य प्रदेश सरकार से इस पूरे मामले में एक्शन टेकन रिपोर्ट तलब की है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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माफिया का आतंक: तोतलाडोह जलाशय में संगठित गिरोह द्वारा अवैध रूप से मछलियां मारकर उन्हें छिंदवाड़ा और सिवनी के रास्ते महाराष्ट्र के बाजारों में सप्लाई किया जा रहा है।
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पीएमओ में शिकायत और एनटीसीए की सख्ती: कैप्टन ब्रजेश भारद्वाज द्वारा पीएमओ में की गई शिकायत के आधार पर एनटीसीए ने मप्र के मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक से रिपोर्ट मांगी है, जिसे पार्क प्रबंधन तैयार कर रहा है।
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सुरक्षा बलों की मांग: वन विभाग और पेंच प्रबंधन के अधिकारियों का कहना है कि माफिया हथियारों से लैस रहते हैं और पेट्रोलिंग दल पर हमले का प्रयास करते हैं। ऐसे में वन विभाग ने विशेष सुरक्षा बलों, एसडीआरएफ (SDRF) और 70 मोटरबोट की मांग की है।
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विस्फोटकों का इस्तेमाल: अधिकारियों के अनुसार, शिकारी वन अमले को डराने और भगाने के लिए पेट्रोल बम जैसे विस्फोटकों का इस्तेमाल करते हैं, जबकि वन कर्मियों के पास हथियार चलाने के अधिकार और पर्याप्त सुरक्षा बल का अभाव है।
जलाशय और अधिकार क्षेत्र का दायरा
मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र की सीमा पर स्थित तोतलाडोह बांध 76 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल में फैला हुआ है, जिसमें से 56 वर्ग किलोमीटर हिस्सा मध्य प्रदेश और 20 वर्ग किलोमीटर हिस्सा महाराष्ट्र के अंतर्गत आता है।
पार्क प्रबंधन और वन बल प्रमुख सुभरंजन सेन का कहना है कि मोटरबोट चलाने और तैराकी में माहिर प्रशिक्षित बल (जैसे एसडीआरएफ या होमगार्ड) की मांग शासन से की गई है, ताकि जलाशय में हो रहे अवैध शिकार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। वहीं, मप्र होमगार्ड की डीजी प्रज्ञा ऋचा श्रीवास्तव का कहना है कि आवश्यकतानुसार समय-समय पर बल उपलब्ध कराया जाता है, और नई भर्तियों के बाद स्थायी बल देने पर विचार किया जाएगा।




