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रियाज मंजिल कोठी पर ‘शत्रु संपत्ति’ का शिकंजा, दस्तावेजों पर उठे सवाल, भोपाल रियासत के अंतिम नवाब की दूसरी पत्नी की नागरिकता की भी जांच

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

कोहेफिजा ‘शत्रु संपत्ति’ विवाद: खानूगांव स्थित रियाज मंजिल कोठी मामले में बढ़ी गरमागरम हलचल, 28 सितंबर को नोटिसधारियों को पक्ष रखने के निर्देश

भोपाल: राजधानी के कोहेफिजा स्थित खानूगांव की ऐतिहासिक ‘रियाज मंजिल’ कोठी और उससे जुड़ी जमीनों का ‘शत्रु संपत्ति’ (Enemy Property) विवाद अब बेहद अहम मोड़ पर पहुंच गया है। मामले की कानूनी वैधता और दस्तावेजों की प्रामाणिकता को लेकर प्रशासनिक स्तर पर प्रक्रिया तेज हो गई है। हाल ही में सहायक अभिरक्षक शत्रु संपत्ति एवं एसडीएम संत हिरदाराम नगर रवीश श्रीवास्तव के समक्ष नोटिसधारियों की महत्वपूर्ण सुनवाई हुई, जिसमें उन्हें अपने दस्तावेज पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • शिकायत और दस्तावेजों की प्रतियां उपलब्ध: सुनवाई के दौरान नोटिसधारियों द्वारा कार्रवाई के आधार बने दस्तावेजों की मांग किए जाने पर, उन्हें शिकायतकर्ता अमिताभ अग्निहोत्री की शिकायत और शत्रु संपत्ति अभिरक्षक कार्यालय से जुड़े 29 अप्रैल 2024 के प्रमाण-पत्र की प्रतियां उपलब्ध करा दी गई हैं।

  • 28 सितंबर को लिखित पक्ष पेश करने के निर्देश: प्रशासन ने सभी संबंधित नोटिसधारियों को इन दस्तावेजों का बारीकी से परीक्षण कर आगामी 28 सितंबर को अपनी लिखित आपत्ति, समर्थन में दस्तावेज और अपना पक्ष प्रस्तुत करने के कड़े निर्देश दिए हैं। प्रशासन द्वारा 16 सितंबर से कोहेफिजा क्षेत्र (विशेषकर खसरा नंबर 42/10 से जुड़े कब्जाधारियों) को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

  • स्टे (Stay) आदेश की मांग: सुनवाई के दौरान कुछ पक्षों द्वारा कार्रवाई पर मौखिक रूप से स्थगन (स्टे) होने की बात कही गई, जिस पर न्यायालय ने नाराजगी जताते हुए अगली सुनवाई में उच्च न्यायालय या सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी स्टे आदेश की प्रमाणित प्रति पेश करने के निर्देश दिए हैं।

  • आफताब जहां बेगम की नागरिकता पर असमंजस: इस पूरे मामले में भोपाल रियासत के अंतिम नवाब हमीदुल्लाह खान की दूसरी पत्नी आफताब जहां बेगम की नागरिकता को लेकर भी अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। कुछ पक्षों का दावा है कि वे ब्रिटिश नागरिक थीं, हालांकि इस संबंध में आधिकारिक और प्रामाणिक दस्तावेजों का सामने आना अभी बाकी है।

  • राजस्व रिकॉर्ड और आगे की प्रक्रिया: अधिवक्ता जगदीश छावानी के अनुसार, यह स्पष्ट होना अत्यंत आवश्यक है कि संबंधित प्रमाण-पत्र में यह जमीन वास्तव में शामिल है या नहीं। राजस्व रिकॉर्ड में ‘शत्रु संपत्ति जांच’ की प्रविष्टि दर्ज है, और 28 सितंबर की आगामी सुनवाई यह तय करेगी कि मामले में आगे प्रशासनिक कार्रवाई की दिशा क्या होगी।

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