एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
14 साल से अ अटकी मंडला की चुटका परमाणु ऊर्जा परियोजना: 2027 से शुरू होगा काम, 2031-32 तक बिजली उत्पादन का लक्ष्य; मध्य प्रदेश को मिलेगी 50% बिजली
भोपाल/मंडला: विस्थापन और मुआवजे के विवादों के चलते पिछले 14 वर्षों से ठंडे बस्ते में पड़ी मध्य प्रदेश की महत्वाकांक्षी चुटका परमाणु ऊर्जा परियोजना पर अब काम शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। सब कुछ तय योजना के मुताबिक रहा, तो अगले वर्ष यानी 2027 से इस परियोजना पर जमीनी स्तर पर काम शुरू हो जाएगा। मानसून सीजन के तुरंत बाद विस्थापित परिवारों को नई कॉलोनी में शिफ्ट करने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी, जिसके बाद जियो टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन का कार्य प्रारंभ होगा।
मुख्य बिंदु (Highlights)
-
21 हजार करोड़ की परियोजना: मंडला जिले में स्थापित होने वाली इस परियोजना की कुल क्षमता 1400 मेगावाट (700-700 मेगावाट की दो इकाइयां) है, जिस पर लगभग 21,000 करोड़ रुपये की लागत आएगी। इसके वर्ष 2031-32 तक पूरी तरह शुरू होकर बिजली उत्पादन करने की संभावना है।
-
मध्य प्रदेश को बड़ा फायदा: इस प्लांट से उत्पादित होने वाली कुल बिजली का 50 प्रतिशत हिस्सा अकेले मध्य प्रदेश को मिलेगा, जिससे राज्य की ऊर्जा जरूरतें और मजबूत होंगी।
-
विस्थापितों की स्थिति: इस परियोजना के दायरे में कुल 330 परिवार प्रभावित हैं, जिनमें से 119 परिवारों को पहले ही मंडला शहर के पास बसाई गई नई कॉलोनी में शिफ्ट किया जा चुका है। बाकी बचे परिवारों को भी मानसून के बाद जल्द ही स्थानांतरित किया जाएगा।
क्यों अटकी थी परियोजना और कैसे सुलझा विवाद?
-
विरोध और अड़चनें: वर्ष 2009-10 में परिकल्पित और 2012 में केंद्र व राज्य सरकार से स्वीकृत इस प्रोजेक्ट को स्थानीय स्तर पर एनजीओ के विरोध और पर्यावरण-स्वास्थ्य को लेकर फैलाए गए भ्रम का सामना करना पड़ा। इसके अलावा, मुआवजा मिलने के बावजूद लोगों द्वारा जमीन खाली न करना और एनपीसीआईएल (NPCIL) द्वारा बनाई गई कॉलोनी के आवासों को छोटा बताना मुख्य बाधाएं थीं।
-
उच्च स्तरीय हस्तक्षेप: मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने भी पत्र लिखकर स्थिति स्पष्ट की थी। इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने ऊर्जा विभाग के अपर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय राज्य स्तरीय समिति का गठन किया। नई रणनीति के तहत लगभग 120 परिवारों को संशोधित मुआवजा दिया गया और सभी अड़चनों को दूर किया गया।
एनपीसीआईएल के प्रवक्ता उमेद यादव के अनुसार, विस्थापन का कार्य इस वर्ष के अंत तक पूरी तरह से निपटा लिया जाएगा और जल्द ही जियो टेक्निकल इन्वेस्टिगेशन (मिट्टी, चट्टानों व भूजल की तकनीकी जांच) का काम शुरू होगा।




