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विदिशा में कैंसर इलाज की बड़ी सौगात, टाटा मेमोरियल की प्रदेश की पहली यूनिट आज से शुरू

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

विदिशा को कैंसर इलाज की बड़ी सौगात: टाटा मेमोरियल सेंटर की प्रदेश की पहली डे-केयर यूनिट का आज होगा शुभारंभ, कीमोथेरेपी समेत मिलेंगी आधुनिक सुविधाएं

भोपाल/विदिशा: मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक अध्याय जुड़ने जा रहा है। देश के प्रतिष्ठित टाटा मेमोरियल कैंसर अस्पताल (मुंबई) की प्रदेश की पहली इकाई का शुभारंभ मंगलवार (8 सितंबर 2026) को विदिशा मेडिकल कॉलेज में होने जा रहा है। पहले चरण में यहां 30 बिस्तरों का डे-केयर सेंटर शुरू किया जा रहा है, जिससे विदिशा के साथ-साथ भोपाल, रायसेन, सीहोर और देवास जैसे आसपास के जिलों के कैंसर मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • आज होगा भव्य शुभारंभ: केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान और परमाणु ऊर्जा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जितेंद्र सिंह इस डे-केयर यूनिट का वर्चुअली या संयुक्त रूप से शुभारंभ करेंगे।

  • क्या-क्या मिलेंगी सुविधाएं? इस यूनिट में टाटा मेमोरियल अस्पताल में उपचार करा रहे या अन्य जरूरतमंद रोगियों को कैंसर विशेषज्ञों की देखरेख में कीमोथेरेपी और रक्त चढ़ाने (ब्लड ट्रांसफ्यूजन) जैसी चिकित्सीय सुविधाएं आसानी से मिल सकेंगी।

  • विशेष प्रशिक्षण और समन्वय: इस इकाई के सफल संचालन के लिए विदिशा मेडिकल कॉलेज के चुनिंदा डॉक्टरों और नर्सेस को विशेष रूप से टाटा मेमोरियल अस्पताल में प्रशिक्षित कराया गया है। साथ ही, यह यूनिट एम्स भोपाल के समन्वय से काम करेगी।

भविष्य की बड़ी योजना: अलग अस्पताल के लिए जमीन चिह्नित

  • लंबी कोशिशों का परिणाम: केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान लंबे समय से विदिशा में टाटा मेमोरियल की यूनिट स्थापित करने के प्रयास में थे। इसी कड़ी में जून माह में विदिशा में एक बड़ा कैंसर शिविर भी लगाया गया था।

  • स्थाई अस्पताल का निर्माण: वर्तमान में मेडिकल कॉलेज के भीतर डे-केयर यूनिट शुरू की जा रही है, लेकिन इसके साथ ही भविष्य में एक स्वतंत्र और पूर्ण विकसित अस्पताल के निर्माण के लिए तीन संभावित भूखंडों को चिह्नित कर लिया गया है। इस स्थाई परिसर में सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी और तमाम एडवांस जांचों की सुविधा उपलब्ध होगी।

स्थानीय स्तर पर इस आधुनिक चिकित्सा सुविधा के शुरू होने से गरीब और मध्यमवर्गीय कैंसर मरीजों का महंगे इलाज के लिए बड़े महानगरों (जैसे मुंबई) के चक्कर काटने का संघर्ष कम होगा, जिससे उनके समय, श्रम और धन की भारी बचत होगी।

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