एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
मध्य प्रदेश में नया फायर एक्ट लागू: 10 मिनट में पहुंचेगी दमकल, लापरवाही पर जेल और झूठी सूचना पर 20 हजार का जुर्माना; कड़े प्रावधानों से लैस हुआ कानून
भोपाल: राज्य में अग्निशमन प्रणाली को पूरी तरह आधुनिक बनाने, आपातकालीन राहत कार्यों में तेजी लाने और आगजनी की घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण पाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश सरकार ने नया ‘फायर एक्ट’ लागू कर दिया है। इस नए कानून के तहत अब फायर ब्रिगेड का रिस्पॉन्स टाइम अधिकतम 10 मिनट तय कर दिया गया है। इसके साथ ही व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए नगरीय निकायों को ‘फायर टैक्स’ वसूलने का अधिकार भी दिया गया है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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कर्मचारियों की लापरवाही पर सख्त सजा: ड्यूटी के दौरान कार्य में लापरवाही बरतने या बिना सूचना के स्थल से गायब रहने वाले दमकल कर्मियों के खिलाफ 3 महीने की जेल, 3 महीने के वेतन की कटौती या दोनों तरह की सजा का प्रावधान किया गया है।
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फर्जी कॉल पर भारी जुर्माना: दमकल विभाग को गुमराह करने या विभाग को झूठी सूचना (फॉल्स अलार्म) देने वाले व्यक्तियों पर 20,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा।
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व्यावसायिक और ऊंची इमारतों के लिए नियम: अस्पतालों, मॉल, कारखानों और 15 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले आवासीय भवनों के लिए फायर एनओसी अनिवार्य कर दी गई है। इसके बिना नगरीय निकाय ‘ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट’ जारी नहीं करेंगे। इन परिसरों में प्रशिक्षित फायर सुपरवाइजर रखना अनिवार्य होगा, अन्यथा नियमों की अनदेखी पर 10,000 रुपये प्रतिदिन तक का दंड वसूला जाएगा।
ढांचागत और प्रक्रियात्मक बदलाव
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नया टैक्स प्रावधान: स्थानीय बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए नगर निगम, नगर पालिका और नगर परिषद संपत्ति कर के साथ ‘फायर टैक्स’ वसूल सकेंगी, जिसकी दरें राज्य शासन द्वारा निर्धारित की जाएंगी।
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नुकसान की भरपाई और न्यायाधिकरण: किसी व्यक्ति की असावधानी या लापरवाही से आग लगने पर आसपास की संपत्तियों को हुए नुकसान की पूरी भरपाई दोषी को करनी होगी। पीड़ित पक्ष 30 दिनों के भीतर आवेदन कर सकेगा, जिसका निपटारा 90 दिनों के भीतर सिविल कोर्ट की तर्ज पर किया जाएगा।
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आयोजनों के लिए नियम: विवाह समारोहों, राजनीतिक और धार्मिक आयोजनों में लगने वाले पंडालों को ‘सेल्फ-रेगुलेटरी’ श्रेणी में रखा गया है, जहां आयोजकों के लिए अग्निरोधी (फायर-प्रूफ) कपड़ों का इस्तेमाल और चौड़े निकास द्वार रखना अनिवार्य किया गया है।
पुलिस थानों की तर्ज पर स्पष्ट सीमांकन वाले नए फायर स्टेशन बनाने और सेफ्टी ऑडिट के लिए प्राइवेट एजेंसियों को लाइसेंस देने जैसे प्रावधानों से प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक पुख्ता होगी।




