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बड़े तालाब के पानी के नीचे मिली सीवेज लाइन, भारत भवन के पास 50 मीटर में हो रहा पक्का निर्माण, NGT ने लिया संज्ञान

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

बड़े तालाब के सर्वे में बड़ा खुलासा: गौरा गांव में झील के भीतर से गुजरी सीवेज लाइन और भारत भवन के पास मिला पक्का निर्माण, एनजीटी टीम कर रही जांच

भोपाल: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की सात सदस्यीय विशेष टीम द्वारा भोपाल के बड़े तालाब की वास्तविक सीमा और कैचमेंट क्षेत्र तय करने के लिए चलाया जा रहा ग्राउंड ट्रुथिंग सर्वे चौथे दिन भी जारी रहा। मुगलिया छाप से लेकर भारत भवन तक चले इस निरीक्षण के दौरान टीम को कई चौकाने वाले तथ्य मिले हैं। सर्वे के दौरान गौरा गांव क्षेत्र में बड़े तालाब के भीतर से गुजरती सीवेज लाइन सामने आई है, जिसने झील के संरक्षण का दावा करने वाले नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • तालाब के भीतर सीवेज लाइन: गौरा गांव क्षेत्र में निरीक्षण के दौरान एनजीटी की विशेष टीम ने पाया कि बड़े तालाब के अंदर से सीवेज लाइन गुजर रही है। इसके अलावा, भारत भवन क्षेत्र में भी तालाब की तय सीमा से 50 मीटर के दायरे के भीतर एक बड़ा पक्का निर्माण टीम के संज्ञान में आया है। अब इन दोनों मामलों की तकनीकी साक्ष्यों और राजस्व रिकॉर्ड से जांच की जाएगी।

  • सेंट्रल पार्क कॉलोनी का निरीक्षण: मंगलवार को मुगलिया छाप से ड्रोन सर्वे शुरू करने के बाद टीम सेंट्रल पार्क कॉलोनी पहुंची। यहां तालाब की पुरानी सीमा तय करने वाली मुनारों से करीब 15 फीट आगे तक पानी फैला हुआ मिला, और कॉलोनी के कुछ हिस्सों में जलभराव के संकेत भी दिखे।

  • अन्य क्षेत्रों में भी गड़बड़ियां: सर्वे टीम ने बिशनखेड़ी रोड, मयंक नर्सरी, सेवानिया गौंड, नाथू बरखेड़ा और एसपीएस के पास भी ग्राउंड ट्रुथिंग की। इस दौरान बिशनखेड़ी तालाब के पास बड़े निर्माण के लिए मिट्टी या मलबा डंप करने की गतिविधि भी देखी गई, जिससे प्राकृतिक जलप्रवाह बाधित होने की आशंका जताई जा रही है।

सर्वे का अगला चरण और टीम का स्वरूप

विशेष टीम ने बड़े तालाब का ड्रोन सर्वे लगभग पूरा कर लिया है, जबकि छोटे तालाब का एक पॉइंट शेष है जिसे बुधवार को कवर किए जाने की संभावना है। इसके बाद टीम कलियासोत और केरवा डैम क्षेत्र की ओर रुख करेगी।

एनजीटी की इस संयुक्त टीम में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB), मध्य प्रदेश वेटलैंड अथॉरिटी, वन विभाग, नगर निगम और राजस्व विभाग के प्रतिनिधि शामिल हैं। इसके साथ ही याचिकाकर्ता राशिद नूर खान और पर्यावरणविद् डॉ. सुभाष सी. पांडेय भी लगातार टीम के साथ मौजूद रहकर हालातों का जायजा ले रहे हैं। मौके पर मिले इन तमाम तथ्यों का अब राजस्व नक्शों और तकनीकी रिकॉर्ड से मिलान किया जाएगा।

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