एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
भोपाल में ईवी चार्जिंग स्टेशनों की लचर रफ्तार: 31 में से सिर्फ 23 स्थानों पर लगी मशीनें, टेस्टिंग में अटकी सुविधा; वहीं 10 स्टेशनों से चार्जिंग ‘गन’ चोरी
भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा देने के लिए शुरू की गई महत्वाकांक्षी ईवी चार्जिंग स्टेशन परियोजना अपनी सुस्त चाल और लचर सुरक्षा व्यवस्था के चलते सुर्खियों में है। FAME-2 योजना के तहत शहर में बड़े पैमाने पर चार्जिंग हब विकसित करने का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन प्रशासनिक सुस्ती और रख-रखाव में लापरवाही के कारण यह योजना अभी तक धरातल पर पूरी तरह उतर नहीं पाई है। आलम यह है कि शहर के 10 चार्जिंग स्टेशनों से कीमती ‘चार्जिंग गन’ ही चोरी हो गई हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
-
लक्ष्य से पीछे परियोजना: FAME-2 योजना के तहत भोपाल में कुल 31 स्थानों पर 148 चार्जिंग मशीनें लगाने का लक्ष्य तय किया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर काम केवल 23 स्थानों तक ही सीमित रह गया है, जहां 120 मशीनें स्थापित की गई हैं।
-
अभी भी टेस्टिंग फेज में मशीनें: कई स्थानों पर मशीनें लगने के बावजूद वे अभी तक ‘टेस्टिंग फेज’ में हैं। इस वजह से आम इलेक्ट्रिक वाहन चालकों को सार्वजनिक चार्जिंग सुविधा का लाभ मिलने में भारी देरी हो रही है। इस परियोजना का जिम्मा भोपाल सिटी लिंक लिमिटेड (BCLL) के पास है, जिसे केंद्र के उपक्रम ‘राजस्थान इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंट्स लिमिटेड’ (REIL) के साथ मिलकर विकसित किया जा रहा है।
-
लागत और केंद्रीय बजट: इस बुनियादी ढांचे को विकसित करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में 912.50 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। एक मध्यम श्रेणी के कमर्शियल चार्जिंग स्टेशन पर 15 से 25 लाख रुपये, जबकि हाई-पावर हब पर 25 लाख से 1 करोड़ रुपये तक का खर्च आता है।
-
सुरक्षा पर सवाल: 10 स्टेशनों से ‘गन’ चोरी: भोपाल में ईवी चार्जिंग स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल उस वक्त खुल गई जब शहर के 10 चार्जिंग स्टेशनों से चार्जिंग गन चोरी होने की जानकारी सामने आई। कीमती उपकरणों के चोरी होने से इन स्टेशनों के रखरखाव और संचालन पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
-
अधिकारियों के बयान:
-
बीसीएलएल की सीईओ अंजू अरुण कुमार ने बताया कि चार्जिंग गन चोरी होने की शिकायत संबंधित थानों में दर्ज करा दी गई है। योजना की शुरुआत थोड़ी धीमी जरूर रही है, लेकिन जल्द ही बाकी स्थानों पर भी स्टेशन पूरी तरह सक्रिय कर दिए जाएंगे।
-
दूसरी ओर, भोपाल के आरटीओ जितेंद्र शर्मा ने स्पष्ट किया है कि ईवी चार्जिंग स्टेशनों को विकसित करने की पूरी जिम्मेदारी बीसीएलएल की है, इसमें परिवहन विभाग की कोई भूमिका नहीं है।
-




