एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / आर्थिक एवं प्रशासनिक डेस्क
मध्य प्रदेश में औद्योगिक महाक्रांति का शंखनाद: जबलपुर-भोपाल-इंदौर एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर के लिए कंपनी गठित, मार्च 2028 तक 1 लाख करोड़ निवेश और 3 लाख रोजगार का मेगा लक्ष्य
भोपाल: मध्य प्रदेश के आर्थिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने और राज्य को औद्योगिक हब के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। प्रदेश के तीन प्रमुख शहरों—जबलपुर, भोपाल और इंदौर को जोड़ने वाले एक्सप्रेस-वे कॉरिडोर के विकास के लिए आधिकारिक तौर पर ‘कॉरिडोर्स डेवलपमेंट कंपनी’ के गठन को मंजूरी दे दी गई है। राज्य सरकार इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए कंपनी को 100 करोड़ रुपये की शुरुआती पूंजी उपलब्ध कराएगी। इस पूरी परियोजना का लक्ष्य मार्च 2028 तक 1 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करना और करीब 3 लाख युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करना है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
-
प्लॉग एंड प्ले (Plug and Play) मॉडल पर आधारित हब: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया कि सड़क किनारे बिखरे हुए उद्योगों के बजाय चुनिंदा स्थानों पर अत्याधुनिक औरियोजित औद्योगिक हब विकसित किए जाएंगे। ‘प्लॉग एंड प्ले’ मॉडल के तहत निवेशकों को जमीन, बिजली, पानी, सड़क, सीवरेज और डिजिटल कनेक्टिविटी से लैस रेडीमेड बुनियादी ढांचा मिलेगा, जहां कंपनियों को आकर केवल अपनी मशीनें लगाकर उत्पादन शुरू करना होगा।
-
टाउनशिप और सामाजिक बुनियादी ढांचा: इन नए औद्योगिक क्षेत्रों के पास ही अत्याधुनिक इंडस्ट्रियल टाउनशिप बसाई जाएंगी, जिनमें श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए आवास, अस्पताल, स्कूल और कौशल विकास केंद्र (Skill Centers) जैसी सभी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध होंगी। इस कंपनी की गवर्निंग काउंसिल के अध्यक्ष स्वयं मुख्यमंत्री होंगे।
-
पहला चरण और लाभान्वित जिले: पहले चरण में लगभग 10,000 एकड़ भूमि पर 3 से 5 बड़े आर्थिक हब विकसित किए जाएंगे, जिसके लिए जबलपुर और आष्टा के पास भूमि चिह्नित कर ली गई है। इस परियोजना से जबलपुर, नरसिंहपुर, रायसेन, भोपाल, सीहोर, देवास और इंदौर जिलों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। पूर्ण विकास के बाद 3 लाख करोड़ से अधिक का निवेश और 6 लाख से ज्यादा रोजगार मिलने की संभावना है।
-
सोयाबीन किसानों के लिए ‘भावांतर भुगतान योजना’: किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने के लिए सोयाबीन उत्पादकों के वास्ते ‘भावांतर भुगतान योजना’ को मंजूरी दे दी गई है। इसके लिए किसानों को 17 अक्टूबर तक अपना पंजीयन कराना होगा, जबकि मंडियों में फसल की बिक्री 22 अक्टूबर 2026 से 15 जनवरी 2027 तक की जा सकेगी।
-
चार बड़ी सिंचाई परियोजनाओं को स्वीकृति: बुरहानपुर की झिरमिटी, रायसेन की बारना, मंदसौर की कयामपुर-सीतामऊ और सिंगरौली की चितरंगी सिंचाई परियोजनाओं के निरंतर संचालन के लिए 3,076.37 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिससे डेढ़ लाख हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि की सिंचाई हो सकेगी।
-
शिक्षा, स्वास्थ्य और न्याय व्यवस्था को मजबूती:
-
शासकीय स्कूलों, छात्रावासों और खेलकूद भवनों के लिए 2,875.20 करोड़ रुपये।
-
आयुष महाविद्यालयों एवं चिकित्सालयों के लिए 3,535 करोड़ और राष्ट्रीय आयुष मिशन के लिए 1,697.62 करोड़ रुपये।
-
विधि एवं विधायी कार्य विभाग (न्यायालयों के संचालन और वेतन-भत्तों) के लिए 15,557.35 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
-
-
सांदीपनि विद्यालयों के परिवहन भत्ते में वृद्धि: जनजातीय कार्य विभाग के अंतर्गत संचालित 94 सांदीपनि विद्यालयों के विद्यार्थियों की वार्षिक परिवहन सहायता राशि 10,000 रुपये से बढ़ाकर 21,000 रुपये कर दी गई है, जिस पर 241.88 करोड़ रुपये खर्च होंगे। साथ ही, नए जिलों (निवाड़ी, मऊगंज, पांढुर्णा और मैहर) में महिला एवं बाल विकास विभाग के नए जिला कार्यालयों और पदों को भी हरी झंडी दे दी गई है।




