एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / शासन एवं रोजगार डेस्क
देश में इतिहास रच रहा मध्य प्रदेश: सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड फ्रेमवर्क लागू करने वाला पहला राज्य बना, जापान-जर्मनी में रोजगार के लिए तैयार होंगे 600 ओबीसी युवा
भोपाल: मध्य प्रदेश सरकार ने रोजगार और कौशल विकास के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मध्य प्रदेश सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड फ्रेमवर्क के तहत परियोजना लागू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। मुंबई स्थित नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) परिसर में इस अनूठी परियोजना की आधिकारिक लिस्टिंग, बेल-रिंगिंग सेरेमनी और त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस पहल के तहत प्रदेश के दूरदराज के क्षेत्रों से ताल्लुक रखने वाले 600 ओबीसी (अन्य पिछड़ा वर्ग) युवाओं को जापान और जर्मनी में रोजगार के अवसर दिलाने के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा।
मुख्य बिंदु (Highlights)
-
देश की पहली अनूठी पहल: मध्य प्रदेश देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है, जिसने ‘सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड फ्रेमवर्क’ के तहत इस तरह की विकासोन्मुख परियोजना को धरातल पर उतारा है।
-
600 युवाओं को विदेशी धरती पर रोजगार: इस योजना के तहत राज्य के ओबीसी वर्ग के कुल 600 युवाओं का चयन किया जाएगा, जिनमें से 300 युवाओं को जापान और 300 युवाओं को जर्मनी में रोजगार के लिए तैयार किया जाएगा।
-
प्रशिक्षण की रूपरेखा: पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कृष्णा गौर के अनुसार, यह महत्वाकांक्षी परियोजना मध्य प्रदेश शासन, नेशनल स्किल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NSDC), नाबार्ड और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज के संयुक्त समन्वय से संचालित होगी। इसके तहत युवाओं को आवासीय कौशल प्रशिक्षण (Residential Skill Training), विदेशी भाषा का ज्ञान और आधुनिक व्यावसायिक दक्षता सिखाई जाएगी।
-
प्रशिक्षण खर्च का वित्तीय मॉडल: इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की लागत का वित्तीय प्रबंधन बहुत ही पारदर्शी तरीके से तय किया गया है:
-
50 प्रतिशत खर्च: राज्य सरकार वहन करेगी।
-
35 प्रतिशत खर्च: सोशल इम्पैक्ट बॉन्ड के जरिए जुटाया जाएगा।
-
15 प्रतिशत खर्च: संबंधित युवा द्वारा वहन किया जाएगा।
-
-
परिणाम-आधारित भुगतान (Pay-for-Success): इस पूरी योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें भुगतान प्रक्रिया पूरी तरह से ‘परिणाम’ (Result-Oriented) से जुड़ी हुई है, यानी युवाओं को सफल प्रशिक्षण और रोजगार मिलने पर ही वित्तीय भुगतान सुनिश्चित होगा।




