एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / रेलवे एवं परिवहन डेस्क
बीना यार्ड का काम खत्म होने के बाद भी यात्रियों की मुश्किलें बरकरार: ट्रेनें 6 से 11 घंटे तक लेट, कनेक्टिंग ट्रेनें छूटने और खान-पान की समस्या से यात्री परेशान
भोपाल: पश्चिम मध्य रेलवे के बीना यार्ड में प्री-नॉन इंटरलॉकिंग और नॉन इंटरलॉकिंग का निर्धारित कार्य 15 अक्टूबर को ही पूरा हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद रेल यात्रियों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। स्थिति यह है कि प्रमुख ट्रेनें 6 से लेकर 11 घंटे तक की देरी से चल रही हैं। सोशल मीडिया से लेकर स्टेशनों तक यात्री लेटलतीफी से त्राहिमाम कर रहे हैं। गोंडवाना, मालवा और पंजाब मेल जैसी महत्वपूर्ण ट्रेनें अपने निर्धारित समय से घंटों पीछे चल रही हैं, जिससे यात्रियों की कनेक्टिंग ट्रेनें तक छूट रही हैं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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यार्ड का काम पूरा होने के बावजूद लेटलतीफी: बीना यार्ड में चरणबद्ध कार्य (14 अगस्त से 15 अक्टूबर तक) तय समयसीमा में पूरे हो चुके हैं, लेकिन ट्रेनों का संचालन पटरी पर नहीं लौट पाया है, जिससे यात्रियों को राहत नहीं मिल रही है।
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घंटों देरी से चल रहीं प्रमुख ट्रेनें:
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ट्रेन नंबर 01123 छह घंटे से अधिक और वाराणसी जाने वाली ट्रेन 12 घंटे से ज्यादा देरी से पहुंची।
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गोंडवाना एक्सप्रेस (12410) तीन घंटे देरी से रवाना हुई।
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ट्रेन नंबर 04132 छह घंटे 30 मिनट लेट रही, जिसमें यात्रियों ने पेंट्री कार न होने और खान-पानी की भारी परेशानी की शिकायत की।
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ट्रेन नंबर 01079 (एआर खान द्वारा शिकायत) 11 घंटे से ज्यादा लेट पाई गई।
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इसके अलावा भोपाल एक्सप्रेस (12155), शताब्दी एक्सप्रेस (12001), मालवा एक्सप्रेस (12919) और पंजाब मेल (12137) जैसी वीआईपी व प्रमुख ट्रेनें भी पिछले एक सप्ताह से 1 से 4 घंटे तक देरी से चल रही हैं।
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कनेक्टिंग ट्रेनें छूटने और टीएआर (TDR) की समस्या: समय पर गंतव्य तक न पहुंच पाने के कारण यात्रियों की आगे की कनेक्टिंग ट्रेनें (जैसे इटारसी में ट्रेन 12646) छूट रही हैं। यात्रियों का आरोप है कि स्टेशन मास्टर द्वारा लेट स्लिप न दिए जाने से उन्हें टीडीआर फाइल करने में भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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रेलवे का पक्ष: जबलपुर मंडल के सीपीआरओ डॉ. मधुर वर्मा के अनुसार, कई ट्रेनें पिछले मंडलों (आरंभिक स्टेशनों) से ही देरी से आ रही हैं। इसके अलावा स्टेशनों पर प्लेटफॉर्म सुधार कार्य और मालगाड़ियों (Freight Trains) के अत्यधिक परिचालन के कारण रेल यातायात पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है, जिसके चलते समयबद्ध संचालन प्रभावित हो रहा है।




