एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / ग्रामीण विकास एवं शासन डेस्क
मध्य प्रदेश में पंचायत कर्मियों पर सख्त शिकंजा: घर या अन्य कार्यालय से नहीं चलेंगी पंचायतें, सचिव और रोजगार सहायकों को अनिवार्य रूप से पंचायत भवन में बैठना होगा
भोपाल: मध्य प्रदेश में ग्रामीण स्तर पर प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सुधारने और जनता की शिकायतों का त्वरित समाधान करने के लिए राज्य सरकार ने कड़ा कदम उठाया है। ‘मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान’ के दौरान मिली व्यापक शिकायतों के बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों (CEO) को सख्त निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत अब सभी पंचायत सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों को अपने घर या अन्य स्थानों के बजाय अनिवार्य रूप से पंचायत भवन में बैठकर ही काम करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य बिंदु (Highlights)
-
शिकायत के बाद एक्शन: मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के दौरान जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी ग्रामीण क्षेत्रों के दौर पर पहुंचे थे, तब ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि सरपंच, सचिव और रोजगार सहायक पंचायत भवन में मौजूद नहीं रहते। वे या तो अपने निजी घरों से कामकाज चलाते हैं अथवा किसी अन्य कार्यालय में बैठते हैं।
-
निजी आवासों में कार्यालय संचालन पर पूरी तरह रोक: पंचायत राज आयुक्त छोटे सिंह द्वारा जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि जिन गांवों में पंचायत भवन बने हैं, वहां तय समय पर कार्यालय संचालित होना चाहिए। यदि भवन उपलब्ध नहीं है, तो सामुदायिक या बहुउद्देशीय भवन का उपयोग किया जाए; किसी भी स्थिति में निजी आवासों में पंचायत कार्यालय संचालित नहीं किए जाएंगे।
-
सामग्री के दुरुपयोग पर नकेल: कार्यालय के उपयोग के लिए शासन द्वारा दी गई सरकारी सामग्री और रिकॉर्ड को घरों या अन्य जगहों पर रखने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए विभाग ने निर्देश दिया है कि सभी सामग्रियां पंचायत भवन में ही रखी जाएं।
-
नियमित निरीक्षण और कार्रवाई के निर्देश: शासन ने सभी जिलों में उच्च स्तर पर नियमित निरीक्षण व्यवस्था लागू करने को कहा है। यदि कार्य-समय के दौरान कोई भी पंचायत कर्मी बिना उचित कारण के अनुपस्थित पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध तत्काल सख्त कार्रवाई की जाएगी।




