एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / स्थानीय निकाय एवं श्रम डेस्क
दीपावली से ठीक पहले मध्य प्रदेश में सफाई व्यवस्था ठप: 1 लाख दैनिक वेतनभोगी सफाईकर्मी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर; भोपाल समेत कई शहरों में लगे कचरे के ढेर, सरकार से वार्ता बेनतीजा
भोपाल: दीपावली के पावन पर्व से ठीक पहले मध्य प्रदेश के विभिन्न शहरों में सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। राज्य भर के नगरीय निकायों में कार्यरत करीब 1 लाख दैनिक वेतनभोगी सफाईकर्मी अपनी प्रमुख मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर चले गए हैं। इसका सबसे बड़ा असर राजधानी भोपाल सहित राजगढ़, विदिशा, नर्मदापुरम, रायसेन और अशोकनगर जैसे प्रमुख जिलों में देखने को मिला है। त्योहार के इस संवेदनशील समय में अचानक कचरा उठना बंद होने से आम नागरिकों और व्यापारियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।
प्रमुख बिंदु (Highlights)
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राजधानी भोपाल में गहराया संकट: भोपाल नगर निगम के कुल 14,000 कर्मचारियों में से करीब 8,000 दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी काम छोड़कर हड़ताल पर बैठ गए हैं। इससे शहर के सभी 85 वार्डों की सफाई व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है और निगम के 800 से अधिक कचरा वाहन खड़े रहे।
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प्रमुख बाजारों में लगे कचरे के ढेर: न्यू मार्केट, एमपी नगर, बिट्टन मार्केट, चौक बाजार, नवबहार सब्जी मंडी और बैरागढ़ जैसे व्यस्त बाजारों में कचरे के अंबार लग गए हैं। कई प्रमुख स्थानों पर दुकानदारों और स्थानीय नागरिकों को खुद ही अपने स्तर पर कचरा हटाना पड़ा।
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त्योहार पर कचरे का बढ़ा बोझ: सामान्य दिनों में जहां भोपाल शहर से लगभग 850 मीट्रिक टन कचरा निकलता है, वहीं दीपावली के दौरान खरीदारी और साफ-सफाई के चलते यह मात्रा बढ़कर करीब 1,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंच जाती है। ऐसे में त्योहार के पीक सीजन में हड़ताल होने से प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है।
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अन्य जिलों का भी बुरा हाल: राजधानी के अलावा राजगढ़ जिले के सभी 14 नगरीय निकायों, विदिशा नगर पालिका, नर्मदापुरम, रायसेन के गैरतगंज और अशोकनगर के शाढौरा में भी सफाई कर्मचारियों की हड़ताल के कारण जगह-जगह कचरे के ढेर नजर आए।
अपर मुख्य सचिव के साथ दो घंटे चली वार्ता बेनतीजा
कर्मचारियों की हड़ताल समाप्त कराने के उद्देश्य से बुधवार शाम को नगरीय विकास एवं आवास विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय दुबे और नगरीय प्रशासन आयुक्त संकेत भोंडवे ने कर्मचारी नेताओं के साथ लगभग दो घंटे तक मैराथन चर्चा की। हालांकि, यह बैठक बेनतीजा साबित हुई और कोई ठोस समाधान नहीं निकल सका।
अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष मगनलाल झांझोट ने स्पष्ट किया है कि कर्मचारी लंबे समय से अपनी जायज मांगों को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। मंगलवार को प्रदर्शन और चक्काजाम के बाद बुधवार को हुई अधिकारियों की बैठक में सरकार की ओर से कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है, इसलिए जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी रहेगी।
सफाई कर्मचारियों की मुख्य मांगें
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दैनिक वेतनभोगी सफाईकर्मियों को शासकीय (सरकारी) कर्मचारी का दर्जा दिया जाए।
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सभी कर्मचारियों को स्थायी किया जाए और ठेका प्रथा (आउटसोर्सिंग व्यवस्था) को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
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कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रतिमाह किया जाए।
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सेवा के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने की स्थिति में उनके परिवार के किसी एक आश्रित सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
त्योहार के इस माहौल में शासन और कर्मचारियों के बीच सहमति न बन पाने के कारण शहरों की सफाई व्यवस्था बहाल होने पर संशय के बादल मंडरा रहे हैं।




