एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / राजनीतिक एवं श्रम डेस्क
सफाई कर्मचारियों के मुद्दे पर गरमाई सियासत: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सीएम मोहन यादव को पत्र लिखकर की 25 हजार न्यूनतम वेतन और स्थायी नौकरी की मांग
भोपाल: मध्य प्रदेश के नगरीय निकायों में कार्यरत दैनिक वेतनभोगी और आउटसोर्स सफाई कर्मचारियों के कम वेतन, असुरक्षित रोजगार और नियमितीकरण के मुद्दों को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर सफाई कर्मचारियों को न्यूनतम 25,000 रुपये मासिक वेतन देने और उन्हें स्थायी नौकरी (नियमितीकरण) दिए जाने की जोरदार मांग की है।
प्रमुख बिंदु (Highlights)
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सरकार के दावों पर सवाल: नेता प्रतिपक्ष ने भोपाल में आयोजित एक पत्रकारवार्ता के दौरान सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि सरकार शहरों की साफ-सफाई और स्वच्छता रैंकिंग का श्रेय तो बड़े गर्व से लेती है, लेकिन इन शहरों को चमकाने वाले सफाई कर्मचारियों को सम्मानजनक जीवन और सुरक्षा देने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। उन्होंने कहा कि आज सफाई कर्मचारी अपने हक और अधिकारों के लिए सड़कों पर आंदोलन करने को मजबूर हैं, लेकिन शासन-प्रशासन उनकी सुध नहीं ले रहा है।
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बेहद कम मानदेय से घर चलाना मुश्किल: उमंग सिंघार ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि राजधानी भोपाल में भी सफाई कर्मचारियों को 29 दिन काम करने के एवज में बमुश्किल 9,000 रुपये वेतन मिलता है। वहीं, प्रदेश के अन्य नगरीय निकायों की स्थिति तो और भी दयनीय है, जहां कर्मचारियों को मात्र 6,000 से 7,000 रुपये मासिक मानदेय दिया जा रहा है। इतनी कम आय में महंगाई के इस दौर में परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और इलाज कराना असंभव हो गया है।
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प्रमुख मांगें: मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में उन्होंने निम्नलिखित मुख्य मांगें उठाई हैं:
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वर्षों से कार्यरत दैनिक वेतनभोगी और विनियमित कर्मचारियों को तत्काल नियमित किया जाए।
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प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में सफाई कर्मचारियों का न्यूनतम मासिक वेतन 25,000 रुपये तय किया जाए।
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ठेका प्रथा और आउटसोर्स व्यवस्था को पूरी तरह समाप्त कर सीधे स्थायी रोजगार दिया जाए।
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सेवाकाल के दौरान कर्मचारी की मृत्यु होने पर उनके आश्रित परिवार के सदस्य को तुरंत अनुकंपा नियुक्ति दी जाए।
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सीवर सफाई के दौरान हुई मौतों और मुआवजे पर भी उठाए सवाल
पत्र के माध्यम से नेता प्रतिपक्ष ने सीवर (मैनहोल) सफाई के दौरान होने वाली त्रासदियों और सुरक्षा पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने सरकार से पूछा कि जून 2023 से जुलाई 2026 के बीच ग्वालियर, रीवा, सतना, इंदौर और उज्जैन में हुई कुल 5 ऐसी घटनाओं, जिनमें 8 लोगों की जान चली गई और 4 अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए थे, के मामलों में पीड़ित परिवारों को अब तक कितना मुआवजा दिया गया है और इन घटनाओं के लिए जवाबदेही किसकी तय की गई है।




