एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / प्रशासनिक एवं आपदा प्रबंधन डेस्क
मध्य प्रदेश के सभी 16 नगर निगमों में ‘शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण’ (UDMA) का गठन: गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना; आपदा से निपटने के लिए तैयार होगा विकेंद्रीकृत ढांचा
भोपाल: मध्य प्रदेश शासन के गृह विभाग ने प्राकृतिक और मानव निर्मित आपदाओं से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए राज्य के सभी 16 नगर निगमों में ‘शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण’ (UDMA) के गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी है। इस व्यवस्था के लागू होने से प्रदेश के प्रमुख शहरों—भोपाल, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, उज्जैन, रतलाम, रीवा, कटनी, सतना, सिंगरौली, बुरहानपुर, खंडवा, सागर, देवास, मुरैना और छिंदवाड़ा—में आपदा प्रबंधन के लिए एक मजबूत और विकेंद्रीकृत ढांचा तैयार हो सकेगा। नगर निगमों के इतिहास में यह पहला अवसर है जब इस तरह के प्राधिकरण का आधिकारिक गठन किया गया है।
प्रमुख बिंदु (Highlights)
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30 दिन में सचिवालय और 24×7 ‘ईओसी’ (EOC) का गठन: अधिसूचना के अनुसार, प्रत्येक नगर निगम को आगामी 30 दिनों के भीतर अपने कार्यालय परिसर में प्राधिकरण का एक अलग सचिवालय स्थापित करना होगा। इस सचिवालय में चौबीसों घंटे (24×7) काम करने वाला ‘नगर आपातकालीन संचालन केंद्र’ (EOC) बनाया जाएगा, जो आपात स्थिति में जिला, राज्य कमांड सेंटर और वल्लभ भवन सिचुएशन रूम से सीधा तालमेल रखेगा। अतिरिक्त नगर निगम आयुक्त स्तर के अधिकारी को इस सचिवालय का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बनाया जाएगा।
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समय-सीमा और कार्ययोजना: प्राधिकरण को अपनी संचालन रूपरेखा 60 दिनों के भीतर और विस्तृत कार्य योजना 90 दिनों के भीतर ‘राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण’ को सौंपनी होगी। इसके अलावा, हर दो साल में कम से कम एक बार इस योजना की समीक्षा करना और मॉक ड्रिल आयोजित करना अनिवार्य किया गया है।
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विस्तृत अधिकार और संसाधन अधिग्रहण: प्राधिकरण को यह अधिकार होगा कि वह आपदा के दौरान राहत कार्यों के लिए किसी भी सरकारी विभाग के संसाधनों को अधिग्रहित कर सके और उन्हें निर्देशित कर सके। प्रभावित क्षेत्रों में वाहनों व आम नागरिकों की आवाजाही को नियंत्रित या प्रतिबंधित करने, मलबा हटाने, खोजबीन अभियान चलाने, अस्थायी पुल बनाने तथा जनसुरक्षा के लिए खतरनाक हो चुके ढांचों को गिराने का अधिकार भी इसके पास होगा। साथ ही, प्रभावितों के लिए भोजन, आश्रय, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित की जाएंगी।
प्राधिकरण की प्रशासनिक संरचना (पदाधिकारी)
इस प्राधिकरण में प्रशासनिक और तकनीकी समन्वय के लिए विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है:
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अध्यक्ष: संबंधित नगर निगम के पदेन आयुक्त।
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उपाध्यक्ष: संबंधित जिले के कलेक्टर।
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प्रमुख सदस्य: भोपाल और इंदौर में पुलिस आयुक्त (Commissioner of Police), तथा अन्य 14 नगर निगमों में संबंधित पुलिस महानिरीक्षक (IG)।
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अन्य सदस्य: संभागीय कमांडेंट होमगार्ड्स/SDERF, मुख्य नगर नियोजक, महापौर द्वारा नामांकित दो वार्ड पार्षद, मुख्य अग्निशमन अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी और नगर निगम के अपर आयुक्त (प्रभारी, आपदा प्रबंधन)।
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विशेष आमंत्रित सदस्य: PWD, PHE और MPEB के मुख्य अभियंता, नगर निगम के मुख्य चिकित्सा अधिकारी तथा नगर निगम अध्यक्ष द्वारा नामित आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ।




