एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia)
भोपाल / अपराध एवं साइबर डेस्क
साइबर ठगी का नया पैंतरेबाजी: म्यूल खातों से एटीएम के जरिए धड़ल्ले से नकदी निकाल रहे ठग; सीसीटीवी फुटेज 3 महीने में डिलीट होने से पुलिस के लिए चुनौती
भोपाल: देश और प्रदेश में बढ़ते साइबर फ्रॉड के मामलों में ठगों ने अब अपने तौर-तरीके पूरी तरह बदल लिए हैं। साइबर ठग धोखाधड़ी की रकम को बैंक खातों में लंबे समय तक रखने के बजाय किराए के ‘म्यूल खातों’ (Mule Accounts) में ट्रांसफर कराते हैं और फिर अपने गुर्गों के जरिए एटीएम से तुरंत नकद निकाल लेते हैं। इससे पुलिस और जांच एजेंसियों के लिए मुख्य आरोपियों तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो गया है। सबसे बड़ी अड़चन यह है कि एटीएम बूथों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग बैंकों के पास अधिकतम तीन महीने तक ही सुरक्षित रहती है, और तब तक जांच की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती।
प्रमुख बिंदु (Highlights)
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एटीएम से कैश निकालने की रणनीति: ठगी के पैसों को जब पीड़ित पक्ष की शिकायत पर बैंक खातों में होल्ड (Freeze) किया जाने लगा, तो ठगों ने इससे बचने का नया रास्ता निकाल लिया। वे ठगी की रकम को तुरंत कई खातों में घुमाकर एटीएम के माध्यम से कैश निकलवा लेते हैं। इसके बाद वह रकम असल में किसके पास पहुंची, इसका सुराग लगाना पुलिस के लिए टेढ़ी खीर बन जाता है।
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जांच में देरी और सबूतों का मिटना: एटीएम से पैसे निकालने वाले की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज सबसे बड़ा साक्ष्य होते हैं, लेकिन बैंकों में यह रिकॉर्डिंग केवल 3 महीने तक ही सुरक्षित रहती है। शिकायत मिलने, बैंक खातों का तकनीकी विश्लेषण करने और संबंधित एटीएम से फुटेज मांगने में अकसर तीन महीने से ज्यादा का वक्त बीत जाता है, जिससे महत्वपूर्ण सबूत नष्ट हो जाते हैं।
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विशेष अभियानों का सीमित असर: साइबर मुख्यालय द्वारा इस वर्ष एटीएम से ठगी की रकम निकालने वालों की पहचान के लिए दो बार विशेष अभियान चलाए गए, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी। प्रक्रियागत देरी और फुटेज की सीमित उपलब्धता के कारण प्रदेश के विभिन्न जिलों में इस संबंध में मात्र छह एफआईआर ही दर्ज हो सकीं।
साइबर पुलिस की नई कार्ययोजना
इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए अब साइबर मुख्यालय ने सख्त कदम उठाने की तैयारी कर ली है। एसपी साइबर प्रणय नागवंशी के अनुसार, राज्यभर के ऐसे एटीएम को चिह्नित किया जा रहा है, जहां से साइबर ठगी की सबसे अधिक राशि निकाली गई है।
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लंबे समय तक फुटेज सुरक्षित रखने के निर्देश: इन चिह्नित एटीएम से संबंधित बैंकों को पत्र भेजकर सीसीटीवी फुटेज को तीन महीने से अधिक समय तक सुरक्षित रखने के लिए कहा जाएगा।
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मासिक रिपोर्ट आधारित मॉनिटरिंग: अब हर महीने की रिपोर्ट तैयार कर उसके आधार पर एटीएम से पैसे निकालने वाले संदिग्धों की पहचान करने की पुख्ता व्यवस्था बनाई जा रही है, ताकि जांच शुरू होने से पहले कोई साक्ष्य हाथ से न निकले।




