भोपाल। राजधानी में पकड़े गए एक लाख 40 हजार रुपये के नकली नोट मामले में जांच के दौरान अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि नकली भारतीय करेंसी बांग्लादेश के रास्ते भारत पहुंचाई जा रही थी और इसके तार पाकिस्तान से जुड़े हैं।
मामले में गिरफ्तार पश्चिम बंगाल के बीरभूम निवासी डॉ. सैफुल इस्लाम से पूछताछ के बाद पुलिस को कई अहम जानकारियां मिली हैं।
जांच में पता चला है कि गिरोह का संचालन पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद और मालदा क्षेत्र से किया जा रहा था। नेटवर्क का मास्टरमाइंड शरीफ उल इस्लाम उर्फ शरीफउल्ला बताया जा रहा है।
उसका बड़ा भाई समीर उल इस्लाम सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में तैनात रह चुका है।
भोपाल में सैफुल इस्लाम को भेज रहा था नकली नोट
पुलिस के अनुसार समीर सीमा क्षेत्र की निगरानी और मूवमेंट संबंधी जानकारी गिरोह तक पहुंचाता था, जिसका इस्तेमाल कर बांग्लादेश से नकली नोटों की खेप भारत लाई जाती थी। शरीफउल्ला ही भोपाल में रह रहे सैफुल इस्लाम को नकली नोट भेज रहा था।
सैफुल को गिरफ्तार करने के बाद भोपाल पुलिस की टीम उसकी निशानदेही पर पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद पहुंची थी। हालांकि मुख्य आरोपी पुलिस के हाथ नहीं लगा, लेकिन उसके नेटवर्क और गतिविधियों से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां मिली हैं।
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी का कनेक्शन
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआइए) की पूर्व जांच में भी यह सामने आ चुका है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी नकली भारतीय करेंसी को बांग्लादेश के रास्ते भारत पहुंचाने में सक्रिय है।
शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि नकली नोटों में इस्तेमाल कागज और प्रिंटिंग तकनीक बेहद उन्नत थी, जिससे असली और नकली नोट में फर्क करना मुश्किल हो रहा था।
भोपाल में “ट्रायल” के तौर पर लाए गए थे नोट
पुलिस पूछताछ में सैफुल इस्लाम ने बताया कि उसे करीब दो लाख रुपये के नकली नोट “ट्रायल” के तौर पर दिए गए थे। वह 28 मार्च को भोपाल पहुंचा था और कुछ ही दिनों में करीब 60 हजार रुपये के नकली नोट बाजार में चला चुका था।
वह छोटी दुकानों और सामान्य लेन-देन में 500 रुपये के नकली नोट इस्तेमाल करता था ताकि किसी को शक न हो। इसके अलावा वह 200 से 300 रुपये में 500 का नकली नोट बेचकर नेटवर्क फैलाने का काम भी कर रहा था।
कई राज्यों तक फैला है नेटवर्क
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह का नेटवर्क राजस्थान, कर्नाटक, पश्चिम बंगाल और मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों तक फैला हुआ है। सूत्रों के अनुसार कोलकाता और हावड़ा को ऑपरेटिंग हब की तरह इस्तेमाल किया जा रहा था, जहां से अलग-अलग राज्यों में सप्लाई चेन संचालित होती थी।
कर्नाटक केस से सामने आया था नाम
शरीफउल्ला का नाम पहली बार वर्ष 2018 में कर्नाटक के बेलगावी जिले में पकड़े गए नकली नोट मामले में सामने आया था। बाद में पश्चिम बंगाल एसटीएफ ने वर्ष 2021 में उसे गिरफ्तार किया था।
पूछताछ में उसने अपने भाई समीर उल इस्लाम की भूमिका का खुलासा किया था। इसके बाद बीएसएफ ने समीर को सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
आरोपी ने जिससे नकली नोट खरीदे थे, उसकी तलाश में पुलिस की टीम पश्चिम बंगाल गई थी। वह नहीं मिला है, लेकिन उसके बारे में कई जानकारियां मिली है। फरार आरोपी लंबे समय से नकली नोट का गिरोह चलाता था। उसका बड़ा भाई बीएसएफ में पदस्थ था। वह भी इसी गतिविधि में संलिप्त था, जिसके चलते उसे सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। पूरे गिरोह की जांच जारी है।- कृष्णगोपाल शुक्ला, थाना प्रभारी, कोहेफिजा




