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भोपाल के आदमपुर खंती के प्रस्ताव पर नहीं बनी सहमति, परिषद ने निगमायुक्त पर छोड़ा फैसला

 

भोपाल। सोमवार को आइएसबीटी कार्यालय में हुई निगम परिषद की बैठक में भी आदमपुर खंती के पुराने कचरे निपटान पर सहमति नहीं बन सकी। भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों के पार्षदों ने इसका विरोध जताया। इससे पहले महापौर परिषद (एमआइसी) में भी दो बार यह मुद्दा आया था, लेकिन वहां से भी इसे स्वीकृति नहीं दी गई थी।

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट ने एक दिसंबर तक आदमपुर खंती के कचरे को खत्म करने के लिए कहा है। यही वजह है कि निगम इसे जल्द से जल्द खत्म करना चाहता है। इसके लिए निगम ने 33 करोड़ रुपये का टेंडर निकाला था, जिस पर करीब 55 करोड़ का टेंडर एक कंपनी डाला था, जो कि बीडिंग राशि से करीब 67 फीसद अधिक है। यही कारण है कि इस टेंडर पर दो एमआइसी बैठक में भी काफी चर्चा हुई, लेकिन इसे स्वीकृति नहीं दी गई और इसे परिषद की बैठक में लाया गया था।

हालांकि यहां भी पार्षदों ने यह कहते हुए इसे स्वीकृति देने से मना कर दिया गया कि यह राशि इतनी अधिक है कि यह अनियमितता के मामले में जांच के घेरे में आ सकता है, जिससे पार्षदों के ऊपर केस दर्ज होगा। इसके बाद परिषद ने इस पर निर्णय के लिए निगमायुक्त को स्वतंत्र छोड़ दिया। हालांकि निगमायुक्त का कहना है कि यह मेरे वित्तीय अधिकार क्षेत्र में नहीं है। निगमायुक्त अधिकतम पांच करोड़ रुपये के टेंडर पर ही निर्णय कर सकती है।

एजेंडे में बदल दिए महापौर परिषद की बैठक के शब्द

बैठक में परिषद बैठक के एजेंडे को लेकर भी महापौर परिषद के सदस्यों ने अधिकारी, कर्मचारियों को आड़े हाथों लिया। एमआइसी सदस्यों का कहना था कि हमने आदमपुर खंती के प्रस्ताव की अनुशंसा नहीं की थी। एमआइसी बैठक में विभागीय अनुशंसा लिखा गया था, लेकिन परिषद की बैठक के एजेंडे में निगम के कर्मचारियों ने संबंधी प्रस्ताव पर मेयर-इन-कौंसिल की अनुशंसा सहित निगम परिषद को विचार के लिए प्राप्त हुआ लिख दिया। इस पर एमआइसी सदस्यों ने निगम के कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की।

एमआइसी और पार्षद बोले- नहीं सुनते अधिकारी, कर्मचारी

बैठक में पार्षद और एमआइसी सदस्यों ने अधिकारी, कर्मचारियों पर मनमानी का आरोप लगाते हुए कहा कि निगम के कई कर्मचारी तो हमारा फोन तक नहीं उठाते हैं। एमआइसी सदस्य आरके बघेल ने कहा कि मेरी की शाखा के कर्मचारी खुद को अभी से बड़ा अधिकारी समझने लगे हैं। उनके सपने बड़े अधिकारी बनने हैं। यही वजह है कि वे हमारे फोन तक नहीं उठाते। ऐसे कर्मचारियों पर कार्रवाई की जानी चाहिए। इस दौरान चंचलेश गिरहारे और आकाश मिश्रा पर फोन न उठाने का आरोप लगाया।

फिर उठा स्लाटर हाउस का मुद्दा

निगम परिषद की लगातार दूसरी बैठक में स्लाटर हाउस में गोकशी के मुद्दे पर जमकर हंगामा हुआ। बैठक शुरू होते ही कांग्रेस पार्षदों ने स्लाटर हाउस मामले में की गई जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग की। कांग्रेस पार्षदों कहना था कि इस मामले में असलम चमड़ा और ड्राइवर के अलावा अन्य किसी पर ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसके लिए जिम्मेदार निगम के अधिकारी, कर्मचारियों के नाम उजागर किए जाएं। नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता आसिफ जकी ने कहा कि उदित गर्ग आरके त्रिवेदी ने स्लाटर हाउस को अनुमति दी थी, उन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। वहीं, पार्षद पप्पू विलासराव घाड़गे ने कहा कि यह मामला सनातन धर्म से जुड़ा मामला है। इसमें शामिल अधिकारी, कर्मचारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है। अधिकारियों को क्यों बचाया जा रहा है। इस पर महापौर ने कहा कि जांच रिपोर्ट में जो अधिकारी, कर्मचारी शामिल होंगे, चाहे वह वर्तमान हो या पूर्व के हों यदि संलिप्तता पाई जाती है कार्रवाई की जाएगी।

कांग्रेस पार्षदों ने की गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग

बैठक के दौरान कांग्रेस पार्षदों ने गाय को राष्ट्रीय पशु करने की मांग की। इस दौरान कांग्रेस पार्षद दल गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का प्रस्ताव लेकर अध्यक्ष की आसंदी तक भी पहुंच गए। कांग्रेस पार्षद मोहम्मद सरवर ने कहा कि कांग्रेस विधायक आतिफ अकील ने विधानसभा में गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का मुद्दा उठाया था। उन्होंने कहा कि हम चाहते हैं कि विधानसभा में तो इस प्रस्ताव को नहीं लाया जा सका, लेकिन हम नगर निगम से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने का प्रस्ताव पास कर प्रदेश सरकार को भेज सकते हैं। इसके लिए कांग्रेस पार्षद दल प्रस्ताव लाने को तैयार है। हालांकि भाजपा पार्षदों ने इस पर कुछ नहीं कहा।

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