भोपाल। एक तरफ रेलवे बड़े-बड़े दावे करता है। ट्रेनों के संचालन से लेकर समयबद्धता पर जोर दिया जाता है, ताकि यात्रियों को परेशानी न हो। वहीं, दूसरी तरफ रेल कर्मचारियों के एक हजार से ज्यादा पद खाली पड़े हैं। दरअसल, रनिंग स्टाफ की कमी के चलते कर्मचारियों को लगातार लंबी शिफ्ट और ओवरड्यूटी करनी पड़ रही है। इसके चलते रेल कर्मचारियों में लगातार तनाव और थकान रहने से ट्रेनों के परिचालन पर भी इसका असर पड़ रहा है।
रिक्त पद और उनका महत्व
स्टेशन मास्टर (90 पद) : स्टेशन पर ट्रेनों का सुरक्षित संचालन, सिग्नलिंग, प्लेटफार्म प्रबंधन और ट्रेन मूवमेंट की निगरानी करते हैं।
प्वाइंट्समैन (170 पद): ट्रैक बदलना, सिग्नलिंग में सहायता और ट्रेनों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करते हैं।
गार्ड/ट्रेन मैनेजर (225 पद): ट्रेन के सुरक्षित संचालन, समयपालन, ब्रेक पावर की निगरानी तथा ट्रेन रवाना करने और गंतव्य तक संचालन की जिम्मेदारी निभाते हैं।
लोको पायलट (295 पद) : ट्रेन चलाने, गति नियंत्रित करने, सिग्नल का पालन करने और यात्रियों व माल की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने का कार्य करते हैं।
सहायक लोको पायलट (355 पद): लोको पायलट की सहायता करते हैं, सिग्नलों पर नजर रखते हैं, इंजन की तकनीकी निगरानी करते हैं और आवश्यकता पड़ने पर ट्रेन संचालन में सहयोग देते हैं।
मेल/एक्सप्रेस लोको पायलट (10 पद): मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का निर्धारित समय पर सुरक्षित संचालन करते हैं तथा उच्च गति में सिग्नल और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करते हैं।
पड़ता है अतिरिक्त दबाव
जानकारी के अनुसार स्टाफ की कमी से ट्रेनों के परिचालन में देरी, प्लेटफार्म व स्टेशन प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता है। यात्री और मालगाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। निशातपुरा जैसे नए स्टेशनों के संचालन और नई ट्रेनों के विस्तार के साथ स्टेशन मास्टर, लोको पायलट, ट्रेन मैनेजर व अन्य रनिंग स्टाफ की आवश्यकता भी बढ़ेगी। पर्याप्त मानव संसाधन नहीं होने पर परिचालन और सुरक्षा, दोनों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
लंबी ड्यूटी से थकान, सतर्कता पर असर पड़ना तय
वर्ष 2020 से 2024 के बीच रेलवे में सेफ्टी कैटेगरी के पदों पर नियमित भर्ती न होने से मौजूदा कर्मचारियों पर कार्यभार का बोझ अत्यधिक बढ़ गया है। 2025 में 178 एएलपी की भर्ती हुई, लेकिन स्टेशन मास्टर, लोको पायलट व ट्रेन मैनेजर के पदों पर कमी अब भी चुनौती है। बिना पर्याप्त आराम के लंबी ड्यूटी से मानसिक थकान बढ़ती है, जिसका असर सुरक्षित रेल संचालन पर पड़ सकता है। – आर के शर्मा, मंडल अध्यक्ष, डब्लूसीआर यूनियन




