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भोपाल में SIR के खिलाफ कांग्रेस का मार्च, दिग्विजय सिंह बोले- निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की सबसे बड़ी जरूरत

एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम

भोपाल में चुनाव आयोग के खिलाफ कांग्रेस का बड़ा प्रदर्शन: मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध में निकाला पैदल मार्च, 13 करोड़ नाम हटाने का लगाया आरोप

भोपाल: मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कांग्रेस पार्टी ने मोर्चा खोल दिया है। पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से लेकर निर्वाचन सदन (मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय) तक एक आक्रोशित पैदल मार्च निकाला। इस दौरान कांग्रेस ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) के नाम पर देश भर में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटे जाने का गंभीर आरोप लगाते हुए देश में लोकतंत्र के खतरे में होने की बात कही।

मुख्य बिंदु (Highlights)

  • प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से निर्वाचन सदन तक मार्च: मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरोध और उनकी कार्यप्रणाली के खिलाफ आयोजित इस प्रदर्शन में पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह विशेष रूप से शामिल हुए। बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता पीसीसी कार्यालय से पैदल मार्च करते हुए निर्वाचन सदन पहुंचे और अपना विरोध दर्ज कराया।

  • 13 करोड़ मतदाताओं के नाम काटने का गंभीर आरोप: कांग्रेस पार्टी ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि ‘एसआईआर’ (SIR) के नाम पर देश भर से लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं। पार्टी का कहना है कि यह चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने और निष्पक्षता पर बड़ा आघात है।

  • दिग्विजय सिंह का तीखा हमला: पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल पर निशाना साधते हुए कहा कि जब से उन्होंने पद संभाला है, तब से चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने पूर्व अधिकारियों का हवाला देते हुए कहा कि अपनाई जा रही प्रक्रिया लोकतांत्रिक सिद्धांतों के विपरीत है।

  • स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव की मांग: कांग्रेस नेताओं ने जोर देकर कहा कि किसी भी मजबूत और सफल लोकतंत्र की सबसे बड़ी बुनियादी शर्त निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव होती है, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में देश का लोकतांत्रिक ताना-बाना खतरे में नजर आ रहा है।

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