एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
भोपाल मेट्रो का बड़ा फैसला: यात्रियों की कमी और बढ़ते खर्च के बीच मेट्रो के फेरे घटाए, 15 सितंबर से लागू हुआ नया टाइम टेबल
भोपाल: राजधानी भोपाल में मेट्रो संचालन के बढ़ते खर्च और सीमित आय के दबाव के बीच मेट्रो प्रबंधन ने एक बड़ा कदम उठाया है। यात्रियों की संख्या अपेक्षाकृत कम रहने और खाली डिब्बों को दौड़ाने से हो रहे वित्तीय नुकसान को देखते हुए प्रबंधन ने 15 सितंबर से मेट्रो के फेरों में बड़ी कटौती कर दी है। सामान्य दिनों में अब 62 की जगह केवल 41 फेरे ही संचालित होंगे।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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सामान्य दिनों में 21 फेरे कम: 13 सितंबर को जारी संशोधित समय-सारणी के अनुसार, सोमवार से शनिवार (सामान्य दिनों) तक मेट्रो के 21 फेरे कम कर दिए गए हैं, जबकि रविवार और अवकाश के दिनों में 6 फेरे कम किए गए हैं। अब रविवार को 70 की बजाय 64 फेरे चलेंगे।
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फ्रीक्वेंसी बढ़ाई गई (30 मिनट का अंतराल): पहले जहाँ दिनभर हर 15 मिनट पर ट्रेनें चलाई जा रही थीं, वहीं अब नए टाइम टेबल के तहत सुबह 11:30 से शाम 5:00 बजे तक मेट्रो की फ्रीक्वेंसी को 15 मिनट से बढ़ाकर 30 मिनट कर दिया गया है। इसके बाद शाम 5:00 से 7:30 बजे तक ट्रेनें पहले की तरह 15 मिनट के अंतराल पर चलेंगी।
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यात्रियों की संख्या की स्थिति: वर्तमान में सामान्य दिनों में रोजाना 500 से 700 यात्री ही मेट्रो में सफर कर रहे हैं, हालांकि रविवार और छुट्टियों के दिन यह आंकड़ा 1,000 से 1,200 तक पहुंच जाता है। शुरुआत में भले ही भारी भीड़ देखने को मिली हो, लेकिन बाद में राइडरशिप काफी सिमट गई।
ऐप अपडेट न होने से यात्रियों को हो रही परेशानी
एक तरफ जहां प्रबंधन ने नया टाइम टेबल लागू कर दिया है, वहीं ‘एमपी मेट्रो’ का मोबाइल ऐप अपडेट न होने के कारण यात्रियों को भ्रम का सामना करना पड़ रहा है। अप्रैल 2026 में लाखों रुपये खर्च कर लॉन्च किए गए इस ऐप में आज भी पुराना शेड्यूल ही प्रदर्शित हो रहा है (जैसे ऐप में एम्स से ट्रेन का समय सुबह 9:30 या सुभाष नगर से 8:50 दर्शाया जा रहा है, जबकि वास्तविक संचालन का समय अलग है)। इससे यात्रियों को सही जानकारी नहीं मिल पा रही है।
प्रबंधन का पक्ष
इस फेरबदल पर एमपी मेट्रो के एमडी एस. कृष्ण चैतन्य का कहना है कि पहले मेट्रो हर 15 मिनट में फेरा लगा रही थी, जिसे अब आवश्यकतानुसार 30 मिनट किया गया है। यह नया टाइम टेबल लोगों की डिमांड को ध्यान में रखकर ही तैयार किया गया है, जिसके चलते फेरों की संख्या में आंशिक संशोधन हुआ है।




