एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
भोपाल में आवासीय क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई: नगर निगम ने बदली कार्रवाई की रिपोर्ट, नया शपथ-पत्र किया पेश
भोपाल: राजधानी भोपाल के आवासीय क्षेत्रों में अवैध रूप से संचालित हो रहे व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के खिलाफ चल रहे एक्शन और सीलिंग की कार्रवाई को लेकर मंगलवार (15 सितंबर) को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई हो रही है। इस बीच, नगर निगम द्वारा कोर्ट में पेश किए गए आंकड़ों और रिपोर्ट में बदलाव का मामला सामने आया है, जिसके बाद निगम ने नया संशोधित शपथ-पत्र न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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बदले गए कार्रवाई के आंकड़े: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर नगर निगम ने पहले शहरभर में 62 हजार से अधिक संपत्तियों को चिह्नित करने और 21 जोन्स में 8,264 नोटिस जारी करने का दावा किया था। हालांकि, विरोध प्रदर्शनों के बाद तैयार किए गए नए शपथ-पत्र में 7,951 प्रतिष्ठानों को चिह्नित कर नोटिस जारी करने की बात कही गई, जिससे आंकड़ों की फेरबहि पर सवाल उठे थे। विसंगति सामने आने के बाद निगम ने रिकॉर्ड का मिलान कर नया शपथ-पत्र पेश किया है।
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कार्रवाई और सीलिंग की स्थिति: निगम ने 31 अगस्त से 2 सितंबर के बीच शहर में कुल 190 प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई की थी, जिसमें 183 प्रतिष्ठानों को स्वेच्छा से बंद कराने के पंचनामा बनाए गए थे और 7 प्रतिष्ठानों को सील किया गया था। हालांकि, व्यापारियों के भारी विरोध के बाद इस कार्रवाई पर रोक लग गई थी।
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सरकार की समिति पर सुप्रीम कोर्ट की नजर: पिछली बार अरेरा कॉलोनी, रोहित नगर और बावड़िया कलां जैसे इलाकों में कार्रवाई के बाद प्रदेश सरकार ने एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया था, जिसके बाद सील किए गए प्रतिष्ठान दोबारा खुल गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने सरकार की इस समिति के गठन को प्रथम दृष्टया अवमानना मानते हुए इसके मूल दस्तावेज तलब किए थे, जिस पर आज की सुनवाई में विशेष रूप से स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है।




