एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
भोपाल गैस त्रासदी मामला: डाउ केमिकल पर भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र को लेकर जिला न्यायालय में जारी है बहस, अब 9 अक्टूबर को होगी अगली सुनवाई
भोपाल: दिसंबर 1984 की विनाशकारी यूनियन कार्बाइड गैस त्रासदी से जुड़े आपराधिक मामले में भोपाल जिला न्यायालय में सुनवाई जारी है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी हेमलता अहिरवार की अदालत में मुख्य रूप से इस बात पर बहस चल रही है कि अमेरिका की डाउ केमिकल कंपनी (जिसे यूनियन कार्बाइड कॉर्पोरेशन की उत्तराधिकारी कंपनी माना जाता है) पर भारतीय अदालतों का अधिकार क्षेत्र लागू होता है या नहीं।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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सीबीआई की पिछली दलीलें: इससे पहले हुई सुनवाई में सीबीआई ने दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 177 का हवाला देते हुए पक्ष रखा था कि अपराध जहां घटित हुआ है, मुकदमे की सुनवाई भी वहीं होनी चाहिए। साथ ही, डाउ कंपनी को गृह मंत्रालय और अमेरिकी न्याय विभाग के माध्यम से समन पहुंचाए जाने की बात भी अदालत के समक्ष रखी गई थी।
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गैस पीड़ित संगठनों की मांग: गुरुवार को सुनवाई के दौरान ‘भोपाल ग्रुप फॉर इन्फार्मेशन एंड एक्शन’ संगठन की ओर से पैरवी करते हुए अधिवक्ता ने अदालत से मांग की कि डाउ केमिकल को यूनियन कार्बाइड के साथ उसके विलय और कंपनी के एकीकरण से जुड़े दस्तावेज पेश करने का निर्देश दिया जाए। संगठन का तर्क था कि डाउ एक तरफ यूनियन कार्बाइड अमेरिका को अलग स्वतंत्र कंपनी बता रही है, लेकिन संबंधित आधिकारिक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर रही है।
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संपत्तियों की कुर्की और पूर्व उपस्थिति का हवाला: पीड़ित संगठन की ओर से यह भी दलील दी गई कि यूनियन कार्बाइड पर भारतीय कानूनों के तहत गंभीर धाराएं दर्ज हैं और वर्ष 1992 से ही उसकी भारतीय संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। साथ ही, डाउ के प्रतिनिधियों द्वारा पूर्व में भारतीय अदालतों में उपस्थित होने का भी उल्लेख किया गया।
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अगली सुनवाई: इस महत्वपूर्ण मामले में अब अगली सुनवाई 9 अक्टूबर को होगी। उस दिन पीड़ित संगठनों की शेष दलीलें सुनी जाएंगी, जबकि सीबीआई अपनी लिखित प्रस्तुति अदालत में दाखिल करेगी।




