एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
जीएसटी काउंसिल की 57वीं बैठक: टैक्स रिफंड और प्रक्रियाएं हुईं सरल, लेकिन रियल एस्टेट सेक्टर में टैक्स दरों में बदलाव न होने से घर खरीदारों को नहीं मिलेगी राहत
भोपाल: वस्तु एवं सेवा कर (GST) काउंसिल की 57वीं बैठक में कर प्रणाली को अधिक सुगम बनाने के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। बैठक के दौरान टैक्स रिफंड, रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया और छोटे-मोटे टैक्स विवादों से जुड़े कानूनी पचड़ों को सरल करने पर विशेष जोर दिया गया है। हालांकि, कारोबारियों को कागजी औपचारिकताओं से राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन आम नागरिकों और घर खरीदने का सपना देख रहे लोगों के लिए यह बैठक मायूसी भरी रही है, क्योंकि टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं किया गया है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर जोर: 57वीं जीएसटी काउंसिल की बैठक में टैक्स रिफंड प्रक्रिया को तेज करने, नए रजिस्ट्रेशन को आसान बनाने और छोटे टैक्स विवादों में अनावश्यक कानूनी कार्रवाई को कम करने के निर्णय लिए गए हैं। इससे डेवलपर्स और कारोबारियों की फंसी हुई पूंजी बाहर निकलने में मदद मिलेगी।
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रियल एस्टेट सेक्टर की दरें यथावत: क्रेडाई (CREDAI) भोपाल ने स्पष्ट किया है कि बैठक में टैक्स दरों में कोई फेरबदल नहीं किया गया है, जिसके चलते रियल एस्टेट सेक्टर और होमबॉयर्स (घर खरीदारों) को कोई सीधा वित्तीय लाभ नहीं मिलेगा।
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पुराने टैक्स स्लैब जारी: निर्माणाधीन आवासों पर पूर्व की भांति पुरानी टैक्स दरें ही लागू रहेंगी। इसके तहत किफायती (Affordable) मकानों पर 1 प्रतिशत और अन्य गैर-किफायती निर्माणाधीन प्रोजेक्ट्स पर बिना इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) के 5 प्रतिशत जीएसटी की व्यवस्था यथावत रखी गई है।
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मकानों की कीमतों में कमी की उम्मीद नहीं: क्रेडाई भोपाल के अध्यक्ष मनोज सिंह मीक के अनुसार, चूंकि टैक्स स्लैब में किसी प्रकार की कटौती नहीं की गई है, इसलिए मकानों की कीमतों में सीधी गिरावट की उम्मीद करना बेमानी है। हाल ही में रेपो रेट बढ़ने से बाजार पर पहले से ही दबाव बना हुआ है, ऐसे में खरीदारों को वास्तविक राहत तभी मिल सकती है जब मकानों की कुल निर्माण लागत में कमी आए।




