एग्रसर इंडिया (AgrasarIndia) भोपाल डेस्क टीम
‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के बजट में बड़ा खुलासा: हीमोग्लोबिन मीटर और क्युवेट की खरीदी में राज्यों की दरों में 10 गुना तक का अंतर, एमपी में टेंडर रद्द
भोपाल: केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी ‘एनीमिया मुक्त भारत अभियान’ के तहत सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों के लिए खरीदे जाने वाले हीमोग्लोबिन मीटर और क्युवेट (Cuvettes) की दरों में देश के विभिन्न राज्यों के बीच भारी असमानता सामने आई है। एक ही निर्माता कंपनी के उत्पादों की कीमतों में 10 गुना तक का अंतर पाए जाने और गंभीर सवाल उठने के बाद मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विस कॉर्पोरेशन ने इस से जुड़ा करोड़ों का टेंडर रद्द कर दिया है।
मुख्य बिंदु (Highlights)
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कीमतों में भारी अंतर: एक ही निर्माता कंपनी ‘आदित्य क्लीनिकल सिस्टम्स’ के उपकरणों पर राज्यों के बीच दरों में चौकाने वाला अंतर देखा गया है। गुजरात के वडोदरा में जहां जांच का खर्च महज करीब 2 रुपये प्रति टेस्ट आ रहा है, वहीं मध्य प्रदेश में इसकी प्रस्तावित दर 10.52 रुपये प्रति टेस्ट थी। इसके अलावा बिहार में यह 13 रुपये और राजस्थान में 20 रुपये प्रति टेस्ट तक दर्ज की गई है।
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90 करोड़ रुपये का था टेंडर: मध्य प्रदेश पब्लिक हेल्थ सर्विस कॉर्पोरेशन द्वारा कुल 90.01 करोड़ रुपये का बड़ा टेंडर निकाला गया था, जिसमें 27,052 मीटर (लगभग 5.67 करोड़ रुपये) और क्युवेट (लगभग 88.80 करोड़ रुपये) की खरीदी की जानी थी।
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एल-1 बोली और रद्दीकरण: इस प्रक्रिया में आदित्य क्लीनिकल सिस्टम्स के डीलर ‘कंठाली ट्रेडर्स’ की बोली एल-1 (न्यूनतम) आई थी, जिसने मीटर के लिए 1,997 रुपये और क्युवेट के लिए 9.89 रुपये की दर दी थी। हालांकि, दरों में भारी अंतर और विवाद की स्थिति बनने के बाद कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक (MD) मयंक अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि डीलर के रेट स्वीकृत न होने के कारण टेंडर को पूरी तरह रद्द कर दिया गया है।
कंपनी की प्रतिक्रिया
इस पूरे मामले पर निर्माता कंपनी ‘आदित्य क्लीनिकल सिस्टम्स’ (अहमदाबाद) के सीईओ आदित्य ठक्कर का कहना है कि वे पूरे भारत में हीमोग्लोबिन मीटर की सप्लाई करते हैं, लेकिन अलग-अलग राज्यों में दरों में अंतर होने के कारणों पर उन्होंने स्पष्ट टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि मामला फिलहाल विचाराधीन है और इसका जवाब कोर्ट में ही दिया जाएगा।




